हां हम तिलचट्टे हैं लेकिन तिल तिल कर चट नहीं करते !

सिस्टम पर कॉकरोच की तरह हमले की खबर पढ़ कर काॅकरोच बिरादरी बहुत खुश है ।अभी तक निकृष्ट श्रेणी में माने जाने वाले कॉकरोच अन्य जानवरों की तरह सार्वजनिक चर्चा में अपने प्रवेश से को लेकर जीवन का सबसे बड़ा, स्टेटस सिंबल ,मानने लगे हैं !कॉकरोच की यह खबर पढ़कर और कॉकरोच का स्टेटस सिंबल बड़ा देखकर श्रीमती काॅकरोचों के स्टेटस के पीछे पड़ गई और उन्हें फर्श पर टहलते , दीवार और दरवाजों के बीच ,बाथरूम में फंसे देख उन्हें घर से बाहर का रास्ता दिखाने का प्रयास करने लगी ।लेकिन उनके वजूद के कारण उन्हें हिट से, हिट, करने को स्थगित कर दिया।

कॉकरोच के इस तरह के बढ़ते वजूद को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए काॅकरोचों की हाई अलर्ट मीटिंग हुई जिसकी अध्यक्षता छः पैर वाले वृद्ध कॉकरोच ने की ।वह बोला हम तिलचट्टे हैं लेकिन जिस तरह से तिल तिल कर यह दो पैर वाली मानव प्रजाति लोगों को चट करती है और अपने वालों को ही चट कर जाती है ऐसी प्रवृत्ति हमारी नहीं है ।वह बोले तिलचट्टा हमारा नाम यूं ही नहीं पड़ा है , हम कभी हार मानने वाले नहीं होते हैं हम में सेंसर लगे हैं जो खतरों को भांप लेते हैं ।जब सिस्टम पर लोगों ने हमले कर सिस्टम का तेल निकाल दिया तो हमारे अनुशासित हमले को सिस्टम से जोड़कर हमें यूं ही बदनाम कर दिया।

इस पर तिलचट्टों के इतिहास से वाकिफ एक तिलचट्टा बोला हमें निकृष्ट जीव माना जाता है लेकिन बगैर किसी को कष्ट देने के बावजूद निकृष्ट की श्रेणी में हमें खड़ा कर दिया है। जबकि हम रेल की पैंट्री हो या रेस्टोरेंट का रसोईघर हो हम ही वहां का किचन वेस्ट खा खा कर उन्हें साफ करते हैं ।वह बोला वैसे तो हमारा असली ठिकाना जंगल है लेकिन जंगलों को ठिकाने लगाने वालों की वजह से हमें जंगल छोड़कर घर-घर में पहुंचना पड़ा ।हम में से कोई सेल्फ पर चढ़कर ,तो कोई बाथरूम में दबकर ,तो कोई दीवारों के बीच फंसकर अपनी जिंदगी बिताते हैं ।असल तो वे निकृष्ट जीव है जिन्होंने जंगलों की जान लेकर हम जैसे कीटों की जीने की पतंग ही काट दी।

इस पर युवा काॅकरोच बोला जब हम युवा को हमारे परंपरागत काम नहीं मिलते हैं तो हमें सिस्टम विरोधी बता दिया जाता है और मानव जाति के युवा प्रॉपर जगह न मिलने के कारण मीडिया, सोशल मीडिया और एक्टिविस्ट बनाकर सिस्टम को सुधारते हैं तो सिस्टम पर हमले की श्रेणी की तुलना हम कॉकरोचों से करते हैं ।वह बोला अरे मनुष्यों को हमने मौसम और माहौल में ढलना सिखाया है। हमारी तर्ज पर वे खतरे को भापना सीख गए हैं । विपरीत परिस्थितियों में हम जीते हैं हर मुश्किल में हम डटे रहते हैं उसका सामना करते हैं यह सारे गुण उनके चुरा चुरा कर और सीख कर हमें ही सिस्टम पर हमले का गुनहगार, यह मानव जाति मानती है ।अरे विपरीत परिस्थितियों में जीना सीखना है तो हमसे सीखे ,हम कभी हार नहीं मानते यह सब गुण देने के बाद भी हम कॉकरोच की कोई औकात इन लोगों ने कभी नहीं समझी। इस कारण हमें भी अब अपने दायित्वों से पीछे हटना होगा, जैसे कि नेताजी चुनाव जीतने के बाद दायित्वों की पोषाक उतारकर स्वार्थ का जैकेट पहन लेते हैं।

इस पर एक और पर्यावरण प्रेमी काॅकरोज बोला हम जब, इको, सिस्टम को चेतावनी देंगे तो सारे सिस्टम, हिट, की जगह हुट हो जाएगे । खेतों में हमारे बैक्टीरिया से नाइट्रोजन का रीसायकल कर इकोसिस्टम को हम संतुलित करते हैं मिट्टी में नाइट्रोजन को घोलकर उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं। इस पर अनुभवी काॅकरोज बीच में बोला अरे चीन में हम कॉकरोचों ने क्रांति कर दी है। हम रोज हजारों क्वींटल किचन वेस्ट को हम तिल चट्टों ने चट कर इकोलॉजिकल साइकिल की उतरी चैन को चढ़ा दिया है। वह बोला हम काॅकरोजों ने सड़ी-गली चीजों को खाकर जैविक खेती और मिट्टी की उर्वरता को खत्म होने से बचाया हैं।

इस पर कई दिनों से चोरी छुपे रहने वाला कॉकरोच बाहर निकला और बोला शतरंज में घोड़ा ,राजनीति में गधा अव्वल होता है इस तरह से हमारी बिरादरी भी अब सामाजिक, सार्वजनिक जिंदगी में उतरेगी और इस तरह के हमलो से बचाव करने के लिए तैयार होगी। जिस तरह अन्य जानवर चुनाव में मुद्दा बनते हैं और फेमस हो जाते हैं इसी तरह अब तिलचट्टों का जिक्र भी लोग करेंगे ।वह बोला राजनीति में जानवर का उपयोग होता है चुनाव सिंबल जानवरों का लेकर इंसान इंसानियत जानवरों को दे देता है और खुद जानवरपने पर उतर आता है। राजनीति में जानवरों का उपयोग अक्सर रूपक के तौर पर होता है ।अब तिलचट्टे भी प्रतीकात्मक रूप से रूपक होगें , जैसे हाथी रिपब्लिकन पार्टी का प्रतीक है, बीएससी पास भी हाथी है, डेमोक्रेटिक पार्टी के पास गधे हैं किसी के पास टाइगर है और टाइगर जिंदा भी बताते हैं तो कोई बब्बर शेर जुमले से डराता है ।चील ,उल्लू, भालू ,कबूतर गेंडे सभी कटाक्ष के लिए इस्तेमाल होकर लोकप्रिय हो गए हैं । राजनीति में ,हार्स ट्रेडिंग, से हॉर्स के हॉर्स पावर बढ़ गए हैं। इसी तरह अब सार्वजनिक जिंदगी में कॉकरोच भी कटाक्ष, रूपक के प्रतीक बनकर अपने नाम तिलचट्टा से अच्छे-अच्छे चट्टानों को तिल तिल का उखाड़ फेंकने के माध्यम होंगे ।लेकिन हम वह तिलचट्टे नहीं हैं जो तिल तिल कर अपने वालों को ही चट कर जाते हैं !

Prem Chand Dwitiya

Prem Chand Dwitiya

Address 34 पत्रकार कॉलोनी बडनगर 456 771 जिला उज्जैन म…

Address 34 पत्रकार कॉलोनी बडनगर 456 771 जिला उज्जैन म प्र है

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