जय जय महादेवा: सावन सोमवार पर भक्ति, शक्ति और संगीत से सजी नवीन शिव स्तुति

सावन की रिमझिम फुहारों, मंदिर की घंटियों, कांवड़ यात्राओं और “हर-हर महादेव” के दिव्य उद्घोष के बीच मन सहज ही भगवान शिव की ओर मुड़ जाता है। प्रकृति जब वर्षा से अभिषिक्त होती है, तब ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं सृष्टि महादेव का जलाभिषेक कर रही हो। इसी पवित्र भावभूमि पर भगवान भोलेनाथ को समर्पित मेरा नया शिव भजन—“जय जय महादेवा”—एक भक्तिमय संगीतमय प्रस्तुति के रूप में सामने आया है।

यह भजन केवल भगवान शिव की नामावली अथवा स्तुति नहीं, बल्कि एक भक्त के मन में उठने वाले प्रश्नों, उसके विश्वास और पूर्ण आत्मसमर्पण की अभिव्यक्ति है। जब मनुष्य जीवन के लाभ-हानि, पाप-पुण्य और अर्थ-निरर्थ की उलझनों में घिर जाता है, तब अंततः उसे वही एक आश्रय दिखाई देता है—महादेव के चरण।

गीत की ये पंक्तियाँ उसी विश्वास को स्वर देती हैं—

“मेरा लेखा तू ही जाने, कौन घाटा कौन लाभ,
कौन पाप की धूल है प्रभु, कौन चले है नंगे पाँव।
तेरी राह पे चल पड़ा हूँ, आँख मूँद विश्वास से,
तेरी ज्योति जल उठी है, मेरे अंतर आकाश में।”

भगवान शिव का स्वरूप अपने आप में अनेक विरोधी प्रतीत होने वाले भावों का अद्भुत सामंजस्य है। वे रुद्र भी हैं और भोले भी। उनके मस्तक पर शीतल चंद्रमा है तो ललाट पर प्रचंड तीसरा नेत्र भी। उनके कंठ में विष है, किंतु हृदय में समस्त सृष्टि के लिए करुणा और अमृत है। वे श्मशानवासी होकर भी जगत के पालनहार हैं। वे मौन समाधि में स्थित योगी भी हैं और डमरू की ध्वनि पर सृष्टि को गति देने वाले नटराज भी।

भजन में शिव के इसी विराट और बहुआयामी स्वरूप को अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया है—

“रुद्र भी तू, शांति भी तू, तू ही अग्नि, तू ही नीर,
तेरे दर पर झुक गया है, मेरा मन अधीर।
भस्म लगा के बैठा भोला, जग का भार उठाए,
जिसने विष को कंठ लगाया, वह अमृत बरसाए।”

“जय जय महादेवा” की संगीत-शैली पारंपरिक शिव स्तुति और आधुनिक सिनेमैटिक भक्ति संगीत का संगम है। इसका आरंभ तानपुरे की शांत ध्वनि, मंदिर की घंटियों, शंख और मंद डमरू के साथ ध्यानमय वातावरण में होता है। धीरे-धीरे तबला, मृदंग, ढोल-नगाड़े, सिनेमैटिक ड्रम्स, स्ट्रिंग्स, बास और इलेक्ट्रिक गिटार गीत को एक शक्तिशाली Bhakti Rock स्वरूप प्रदान करते हैं।

भजन का संगीत-विन्यास शांत आलाप से प्रारंभ होकर भावपूर्ण अंतरों, ऊर्जावान मुखड़े, शिव नामावली और सामूहिक “हर हर महादेव” उद्घोष के भव्य उत्कर्ष तक पहुँचता है। इस प्रयोग का उद्देश्य भक्ति की मूल आत्मा को अक्षुण्ण रखते हुए युवा श्रोताओं के लिए भी शिव स्तुति को नवीन, प्रभावशाली और रुचिकर रूप में प्रस्तुत करना है।

गीत का मुखड़ा सहजता से भक्त के मन की प्रार्थना बन जाता है—

“जय जय भोलेनाथ, जय मेरे शंभुनाथ,
महादेव कैलाशपति, रख दो अपना हाथ।
नीलकंठ त्रिलोचन, कर दो कृपा हे नाथ,
हर हर भोलाशंकर, जय जय विश्वनाथ।”

सावन मास भगवान शिव की आराधना का विशेष काल माना जाता है। इस महीने में शिवभक्त व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करते हैं, बेलपत्र चढ़ाते हैं और “ॐ नमः शिवाय” का जप करते हैं। सावन सोमवार का व्रत केवल किसी सांसारिक कामना की पूर्ति का माध्यम नहीं, बल्कि मन को संयम, श्रद्धा और आत्मचिंतन की ओर ले जाने वाला आध्यात्मिक अवसर भी है।

कांवड़ यात्रा भी इसी श्रद्धा का विराट स्वरूप है। शिवभक्त अनेक कठिनाइयों के बावजूद पवित्र गंगाजल लेकर शिवालयों की ओर बढ़ते हैं। यह यात्रा बताती है कि सच्ची भक्ति केवल मंदिर तक पहुँचने में नहीं, बल्कि उस अनुशासन, सेवा, त्याग और विश्वास में भी है, जिसके सहारे भक्त अपनी यात्रा पूरी करता है।

भजन में केदारनाथ, विश्वनाथ, महाकाल, ओंकारेश्वर, पशुपतिनाथ, भूतनाथ, नटराज, अर्धनारीश्वर और आशुतोष जैसे शिव के अनेक नामों को भी संगीत की लय में पिरोया गया है। प्रत्येक नाम भगवान शिव के किसी विशेष गुण और आध्यात्मिक स्वरूप को प्रकट करता है।

“केदारनाथ, ओंकारेश्वर, अमलेश्वर भगवान,
महाकाल मृत्युंजय, हर लो सब अभिमान।
पशुपतिनाथ, भूतनाथ, आदिनाथ अविनाश,
आशुतोष उमापति, कर दो मन में वास।”

इस रचना का सबसे आत्मीय भाव उस क्षण में प्रकट होता है, जब भक्त अपने सारे अधिकार, अहंकार और भ्रम महादेव को सौंप देता है—

“अब न मेरा कुछ भी मेरा, सब तेरा ही तेरा,
सर पर रख दे हाथ प्रभु, अब और कौन है मेरा।”

‘Mukesh Aseemit Creations—Music with Mukesh’ के माध्यम से मेरा प्रयास भक्ति संगीत, कबीर-निर्गुण भजन, सूफी संगीत, काव्यगीत और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं को नवीन संगीतमय प्रयोगों के साथ प्रस्तुत करना है। गीत के शब्द और भाव मेरी मौलिक रचना हैं तथा संगीत-संयोजन डिजिटल संगीत एवं AI-सहायित मंच के माध्यम से तैयार किया गया है।

सावन सोमवार के इस पवित्र अवसर पर भगवान भोलेनाथ को समर्पित “जय जय महादेवा” अवश्य सुनें। महादेव की कृपा आप सभी पर बनी रहे और आपके जीवन में सुख, शांति, आरोग्य तथा सद्बुद्धि का प्रकाश भरता रहे।

पूरा भजन YouTube पर सुनें:
https://youtu.be/ly-e6czL1-0

भजन सुनने के बाद अपनी प्रतिक्रिया अवश्य साझा करें और श्रद्धापूर्वक लिखें—

हर हर महादेव!
जय जय महादेवा!

डॉ मुकेश 'असीमित'

डॉ मुकेश 'असीमित'

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी,…

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी, राजस्थान पिन कोड -३२२२०१ मेल आई डी -thefocusunlimited€@gmail.com पेशा: अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ लेखन रुचि: कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं प्रकाशित  पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से ) काव्य कुम्भ (साझा संकलन ) नीलम पब्लिकेशन से  काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन ) लायंस पब्लिकेशन से  अंग्रेजी भाषा में-रोजेज एंड थोर्न्स -(एक व्यंग्य  संग्रह ) नोशन प्रेस से  –गिरने में क्या हर्ज है   -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह ) भावना प्रकाशन से  प्रकाशनाधीन -व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन )  किताबगंज   प्रकाशन  से  देश विदेश के जाने माने दैनिकी,साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित  सम्मान एवं पुरस्कार -स्टेट आई एम ए द्वारा प्रेसिडेंशियल एप्रिसिएशन  अवार्ड  ”

Comments ( 0)

Join the conversation and share your thoughts

No comments yet

Be the first to share your thoughts!