“ज्यों जल” हिंदी कविता by Mahadev Premi

Mahadev Prashad Premi May 10, 2020 Poems 2

नाव में बढ़ा जल और घर में बढे धन दौलत की एक ही दशा होती है. जैसे नाव में बढ़ा जल अगर अंजलि भर भर बहार को निकला नहीं गया तो वह नाव को डूबा देगा उसी प्रकार घर में बढे धन को अगर सदुपयोग नहीं किया तो बह विनाश की और ले जाता है ||

साईं हिंदी कविता by Mahadev “premi”

Mahadev Prashad Premi May 9, 2020 Poems 0

आज मेरी कविता साईं इस संसार के छल कपट मोह माया के जाल में फंसे हुए इंसान की तरफ इंगित करती है. की कैसे इस संसार के मोहजाल में अपनी स्वार्थ सिद्धि में इंसान अपने सही मूल्यों को भूलता जा रहा है “सांई”साईं इस संसार में ,मतलब के सब लोग,स्वारथ सिद्धी हो गयीं,भूल गये संयोग, […]

“दौलत” Doulat Hindi Poem by Mahadev Premi

Mahadev Prashad Premi May 8, 2020 Poems 0

आज की मेरी रचना दौलत रुपी मिथ्या भुलाबे में जो मानव जगत अपनी बहुमूल्य निधि अपना परिवार और मानव धर्म को भूल रहा है. उस दौलत के मिथ्या और छन भंगुर होने का अहसास कराता है .यहाँ दौलत शीर्षक से कविता कुंदिली विधा में रचित है जिसके ६ चरण है,सामान्यतया मेरी जितनी भी रचना है […]

“तिनका ” हिंदी कविता by Mahadev premi

Mahadev Prashad Premi May 7, 2020 Poems 0

आज की मेरी कविता उन दुराभावो को दूर करने के लिए प्रेरित है जिस के चलते हम अपने से तुच्छ या नीचे ओहदे बाले व्यक्तियों कोइ सैदेव उलाहना या निंदा करते है. किसी भी व्यक्ति विशेष को उसके पद या हैसियत के हिसाब से छोटा या नीच नहीं समझना चाहिए,परिस्थितिया आपके प्रतिकूल होने पर ही […]

Kalyug (कलयुग) हिंदी कविता by Mahadev Premi

Mahadev Prashad Premi May 5, 2020 Poems 0

कलयुग की उल्टी लीला से सभी सामना कर रहे है. कलयुग के रूप में जो उल्टी गंगा बह रही है उसका सटीक वर्णन करती हुई यह कविता आपके समक्ष प्रस्तुत है “कलयुग” कलयुग झूठ अधार है,कलयुग बेईमान,कपट, द्वेष ,पाखंड सब, हैं अवगुण की खान, है अवगुण की खान ,कि भोगी योगी बन गये,चोर लुटेरे साधु […]

Duniyadaari (दुनियादारी ) हिंदी कविता by Mahadev ‘Premi “

Mahadev Prashad Premi May 5, 2020 Poems 1

Duniyadaari (दुनियादारी ) kundili रचना इस दिनिया के मायाजाल को देख कर बनायीं है ,कैसे मनुष्य इस मायाजाल में फंसकर अपनी साड़ी जिंदगी व्यर्थ क्र देता है और जो उसका परम उद्देश्य इस जीवन में अपने आपको पहचानने का है उसको भूल गया है.

“चटनी और अचार” हिंदी कविता -by Mahadev Premi

Mahadev Prashad Premi May 4, 2020 Poems 0

जैसा की आप सभी जानते है भारतीय पाक कला विज्ञान में पुरातन काल से ही चटनी और अचार का विशेष महत्व है. हमारे नित प्रतिदिन के खानपान में इसका समावेश रहता है. यह न केवल एक प्रकार से खाने का मेनू बढाने के लिए है बल्कि इसका एक वैज्ञानिक कारन है. यहाँ भारत का परम्परिक सूप है जो भूख बढाता है तथा पाचन शक्ति की व्रद्धि करता है. आज की मेरी कविता इसी पाक विशेष "चटनी औ अचार " को समर्पित है.

“लाठी” हिंदी कविता (Laathi Hindi Poem ) by Mahadev ‘Premi ‘

Mahadev Prashad Premi May 3, 2020 Poems 0

आज की मेरी कविता लाठी को समर्पित. जी हा लाठी, हमारे देश के पुरातन काल का सबसे ज्यादा प्रचलित हथियार है जो बहुद्देशीय है और हमारी संस्कृति का एक अभिन्न अंग है. आइये जानिये कैसे लाठी का एक महत्वपूर्ण योगदान हमारी दीनिक जीवन चर्या में है इस कविता के माध्यम से “लाठी” लाठी हथियन देखकर,खड़े […]

Patang (kite) पतंग Hindi poem by Mahadev Premi

Mahadev Prashad Premi May 2, 2020 Poems 1

आज की मेरी कविता पतंग और पतंग बाजी को समर्पित. हमारे देश में पतंगबाजी खेल एवं मनोरंजन की ऐसी विधा है जो देश के हर कोने में पायी जाती है. लोग त्यौहार या किसी खुशी के अवसर पर परिवार के साथ इस पतंबाजी का शौक पूरा करते है. देश में कई जगह पतंग महोत्सव भी […]

Corona (कोरोना) Hindi poem by Mahadev Premi

Mahadev Prashad Premi Apr 30, 2020 Poems 1

पूरा विशव इस कोरोना रुपी महामारी से पीड़ित है ऐसे में मुझ से भी रहा नहीं गया.एक छोटी सी रचना इस कोरोना रुपी राक्षस को समर्पित है The whole world is suffering from this corona pandemic, in such a situation, why should I be behind. A small composition is attributed to this corona monster. “कोरोना”जब […]