जल संकट : टिकाऊ प्रबंधन की अनिवार्यता

Dr Shailesh Shukla Jul 24, 2025 समसामयिकी 1

भारत में जल संकट गहराता जा रहा है। 18% जनसंख्या के बावजूद भारत के पास मात्र 4% जल संसाधन हैं। जलवायु परिवर्तन, अति-दोहन और नीतिगत असफलताओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दिल्ली, बेंगलुरु जैसे शहर "डे ज़ीरो" झेल चुके हैं। प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता चिंताजनक स्तर तक घट चुकी है। अब यह केवल पर्यावरण नहीं, एक सामाजिक-राजनीतिक संकट बन चुका है।

भारत में सहकारिता का सशक्तिकरण और 2025 अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष

Poonam Chaturvedi Jul 23, 2025 समसामयिकी 0

संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2025 को 'अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष' घोषित किया जाना भारत के सहकारी आंदोलन के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। “सहकार से समृद्धि” की दृष्टि के साथ, भारत वैश्विक मंच पर अपनी भागीदारी दर्शा रहा है। नीतिगत सुधार, तकनीकी नवाचार, और सामुदायिक भागीदारी—ये तीन स्तंभ सहकारिता को सतत विकास की दिशा में सशक्त बनाएंगे।

हरियाली और विकास : क्या दोनों एक साथ संभव हैं?-समसामयिक लेख

Poonam Chaturvedi Jul 21, 2025 समसामयिकी 0

भारत में हरियाली और विकास की बहस पुरानी है। अक्सर आर्थिक तरक्की के नाम पर पर्यावरण की अनदेखी होती रही है। पर यह टकराव अनिवार्य नहीं। सही नीतियों, जन-जागरूकता और पर्यावरण-संवेदनशील विकास मॉडल के ज़रिए हरियाली और तरक्की दोनों संभव हैं। स्कैंडिनेवियाई देश इसका उदाहरण हैं, और भारत में भी ऐसी संभावनाएं बन रही हैं।