डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 19, 2026
Self Help and Improvements
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भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका युवा मन है—साहसी, आकांक्षी और साफ़ दिल वाला। राष्ट्र-निर्माण केवल सड़क-पुल नहीं, मूल्यों और चरित्र का निर्माण है। जब युवा सेवा, उद्यमिता और नीति-भागीदारी से जुड़ते हैं, तो भविष्य आकार लेता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 19, 2026
Science Talk (विज्ञान जगत )
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यह लेख विकासवाद को केवल जीन या व्यक्ति की सीमा में नहीं बाँधता, बल्कि एपिजेनेटिक्स, सामाजिक प्रजातियों और मानव सांस्कृतिक विकास के माध्यम से यह दिखाता है कि परिवर्तन हमेशा सामूहिक परिस्थितियों में आकार लेता है। जीन बीज हैं, पर उनका भविष्य समाज, पर्यावरण और समय तय करता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 18, 2026
शोध लेख
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मनुष्य ने जब अनुभव को कहानी में बदला, उसी क्षण सभ्यता का जन्म हुआ। आग के चारों ओर सुनाई गई पहली कथा से लेकर लोककथाओं, महाकाव्यों और आधुनिक डिजिटल कथाओं तक—स्टोरीटेलिंग वह अदृश्य धागा है जिसने स्मृति, संस्कृति और सामाजिक चेतना को एक साथ बाँधे रखा। यह लेख उसी निरंतर बहती कथा की यात्रा है, जहाँ कहानी केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की आत्मा है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 16, 2026
व्यंग रचनाएं
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“जो लिखा है, वही होगा—बाक़ी सब तर्क अतिरिक्त हैं।”
“किस्मत ने परमानेंट मार्कर से लिखा है साहब।”
“इंसान से सहमति नहीं ली गई, फिर भी संविधान लागू है।”
“कुछ लोग फूल लिखाकर लाए, कुछ काँटे समेटते रह गए।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 14, 2026
शोध लेख
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इलियड और महाभारत केवल युद्ध की कथाएँ नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर चल रहे संघर्षों का महाकाव्य हैं।
जहाँ अखिलीस का क्रोध कथा को गति देता है, वहीं महाभारत में धर्म और अधर्म का द्वंद्व पूरी सभ्यता को झकझोर देता है।
दो अलग भूगोल, दो अलग संस्कृतियाँ—पर प्रश्न वही: युद्ध के बाद मनुष्य क्या बनता है?
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 14, 2026
व्यंग रचनाएं
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मरना तय था, यह हम मान चुके थे—
पर किस तत्व से मरना है, यह विकल्प भी अस्पताल तय करेगा,
यह हमें बताया नहीं गया।
पहले आग, अब पानी…
लगता है अस्पताल पंचतत्व को
सीरियल-वाइज टेस्ट कर रहा है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 10, 2026
व्यंग रचनाएं
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दुनिया की कूटनीति कभी-कभी इतनी जटिल नहीं होती, जितनी एक रूसे फूफा की नाराज़गी।
एक फोन कॉल, थोड़ी तारीफ़ और ज़रा-सा अपनापन—
न हो तो टैरिफ, ट्वीट और ताने वैश्विक स्तर पर चलने लगते हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 10, 2026
समसामयिकी
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“युद्ध अब अचानक नहीं फूटता—वह पहले बाज़ार में उतरता है, फिर जीवन में।”
“जब शांति लाभकारी नहीं रह जाती, तब युद्ध नैतिक घोषित कर दिया जाता है।”
“हर युद्ध के बाद कोई विजेता नहीं होता—सिर्फ़ आँकड़े होते हैं।”
“इतिहास मनुष्य से एक ही प्रश्न पूछता है—क्या तुमने पहले से सीखा?”
Ram Kumar Joshi
Jan 9, 2026
व्यंग रचनाएं
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मेरा बाप घर में मर गया,
पर बाबूजी की फ़ाइल में अभी ज़िंदा है।
बिन पैसे के यहाँ कोई मरता नहीं—
यहाँ मौत भी सरकारी प्रक्रिया है।
Prem Chand Dwitiya
Jan 8, 2026
व्यंग रचनाएं
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सोशल मीडिया पर बैन की ख़बर ने किशोरों को सिर्फ़ चिंतित नहीं किया, उन्हें किंकर्तव्यविमूढ़ कर दिया।
जहाँ किशोर अपनी डिजिटल पहचान के छिनने से डर रहे हैं, वहीं बुज़ुर्ग पीढ़ी उसी स्मार्टफोन में गुम है, जिस पर प्रतिबंध की बात हो रही है।
यह कहानी केवल मोबाइल की नहीं, बल्कि पीढ़ियों के दोहरे चरित्र और डिजिटल नैतिकता की है।