Prem Chand Dwitiya
Sep 20, 2026
व्यंग रचनाएं
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फर्स्ट एसी में चूहों और कॉकरोचों की खबर से शुरू होकर यह व्यंग्य लोकप्रियता, सेलिब्रिटी संस्कृति और राजनीति की विचित्र दुनिया तक पहुँचता है। मूषक महाराज के पास आतंक भी है, इतिहास भी और गणेश जी की सवारी होने का गौरव भी—फिर भी कॉकरोच उनसे आगे कैसे निकल गया? डॉ. प्रेमचंद द्वितीय का चुटीला व्यंग्य इसी विडंबना पर तीखा कटाक्ष करता है।
Dr Shailesh Shukla
Sep 19, 2026
शोध लेख/विमर्श
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देवेन्द्र माँझी का साहित्य आम आदमी की भूख, ग़रीबी, राजनीतिक पाखंड, न्यायिक विसंगतियों, स्त्री-शोषण, सांप्रदायिकता और टूटते मानवीय मूल्यों का प्रामाणिक दस्तावेज़ है। प्रस्तुत लेख उनके सृजन-संसार में व्याप्त सामाजिक चेतना का उदाहरणों सहित समग्र विश्लेषण करता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Sep 19, 2026
Agriculture/environment
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भारत में चावल उत्पादन लगभग दो दशकों की सबसे बड़ी गिरावट की ओर बढ़ सकता है। क्या इससे आम परिवार का राशन महँगा होगा, या 59.6 मिलियन टन सरकारी भंडार कीमतों को संभाल लेगा? पढ़िए तथ्यात्मक विश्लेषण।
Anushka Garg
Sep 17, 2026
India Story \बात अपने देश की
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₹2,000 से अधिक UPI भुगतान पर 0.4% MDR की खबर को “UPI Tax” कहा जा रहा है। जानिए शुल्क वास्तव में किस पर लगेगा, P2P भुगतान क्यों मुफ्त रहेंगे और छोटे व्यापारियों को क्या छूट मिली है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Sep 16, 2026
व्यंग रचनाएं
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समझदार कहलाना हमेशा सम्मान नहीं होता। कई बार समाज उसी आदमी से सबसे ज्यादा एडजस्टमेंट, माफी, त्याग और समझौते की उम्मीद करने लगता है। इसी विडंबना पर आधारित एक चुटीला हास्य-व्यंग्य।
Prem Chand Dwitiya
Sep 13, 2026
व्यंग रचनाएं
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महंगाई अब केवल बाजार के किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं रही। शक्कर और प्याज जैसी ठोस वस्तुओं से लेकर तेल-पेट्रोल जैसे द्रव पदार्थों और घरेलू गैस तक—उसने पदार्थ की तीनों अवस्थाओं में आम आदमी को जकड़ लिया है। पढ़िए डॉ. प्रेमचंद द्वितीय का हास्य-व्यंग्य।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Sep 12, 2026
India Story \बात अपने देश की
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हम जिन “साँपों” को विश्वास और समर्थन का दूध पिलाते हैं, उनसे बार-बार विष ही क्यों मिलता है? पढ़िए डॉ. मुकेश ‘असीमित’ के व्यंग्य गीत “नाग पंचमी हर पल” का भावार्थ और सुनिए पूरा गीत।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Sep 12, 2026
Darshan Shastra Philosophy
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जब जीवन की नैया भँवर में फँस जाए, तब हनुमान जी पर विश्वास सबसे बड़ी पतवार बनता है। जानिए भावपूर्ण लोक-भजन “तेरी डोरी थामी हनुमान” का आध्यात्मिक संदेश।
Prem Chand Dwitiya
Sep 11, 2026
व्यंग रचनाएं
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मोबाइल में सैकड़ों कॉन्टैक्ट, दर्जनों व्हाट्सऐप ग्रुप और सोशल मीडिया पर अनगिनत दोस्त—फिर भी जीवन में अकेलापन क्यों बढ़ रहा है? डॉ. प्रेमचंद द्वितीय का यह हास्य-व्यंग्य वर्चुअल दोस्ती, वास्तविक रिश्तों, रिटायरमेंट और बदलते सामाजिक जीवन पर तीखी लेकिन मनोरंजक टिप्पणी करता है।
Prem Chand Dwitiya
Sep 4, 2026
व्यंग रचनाएं
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सोशल मीडिया के डिजिटल दरबारों ने घाघ-भड्डरी की लोक-कहावतों से लेकर मौसम विभाग तक सबको पीछे छोड़ दिया है। पढ़िए मौसम की ऑनलाइन भविष्यवाणियों और किसानों की उलझनों पर डॉ. प्रेमचंद द्वितीय का चुटीला व्यंग्य।