भारत, विश्व-संघर्ष और बदलती भू-राजनीति

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 9, 2026 Foreign Affair 0

ईरान, ताइवान, रूस और वेनेज़ुएला के बीच चल रहे वैश्विक तनाव के बीच भारत एक निर्णायक भूमिका में उभर रहा है, जहाँ संतुलन, रणनीति और कूटनीति ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

एक ही देश में अलग-अलग राजनैतिक सच्चाइयाँ दिखाता सोशल मीडिया

Dr Shailesh Shukla Apr 5, 2026 India Story \बात अपने देश की 1

सोशल मीडिया ने एक देश में कई समानांतर वास्तविकताएँ बना दी हैं एल्गोरिद्म हमें वही दिखाते हैं जो हम देखना चाहते हैं झूठी खबरें सच्चाई से तेज़ फैलती हैं डिजिटल ध्रुवीकरण लोकतंत्र के लिए खतरा बन चुका है

होरमुज जलडमरूमध्य के बंद होने से उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट

Dr Shailesh Shukla Mar 28, 2026 समसामयिकी 0

होरमुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जिसके बंद होने से तेल कीमतों में भारी वृद्धि, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और विशेष रूप से ऊर्जा आयातक देशों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

कृत्रिम मेधा आधारित शिक्षा : क्या शिक्षक की भूमिका बदलेगी या समाप्त होगी?

Dr Shailesh Shukla Mar 24, 2026 शोध लेख/विमर्श 1

कृत्रिम मेधा शिक्षा को तेज़, व्यक्तिगत और सुलभ बना रही है, लेकिन इसके साथ ही रचनात्मकता, नैतिकता और समानता जैसी चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं। इस बदलते दौर में शिक्षक की भूमिका समाप्त नहीं, बल्कि और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है—एक मार्गदर्शक और संवेदनशील निर्माता के रूप में।

आखिर क्यों देश भर में निरंतर लोकप्रिय हो रहा है विकास का उत्तर प्रदेश मॉडल

Dr Shailesh Shukla Mar 22, 2026 शोध लेख/विमर्श 1

क्या कारण है कि उत्तर प्रदेश का विकास मॉडल आज पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है? आर्थिक प्रगति, निवेश, अवसंरचना और प्रशासनिक सुधारों का यह समन्वित मॉडल विकास की नई परिभाषा प्रस्तुत करता है।

एकात्म मानववाद : भारतीय चिंतन की समग्र विकास-दृष्टि

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 13, 2026 शोध लेख/विमर्श 0

एकात्म मानववाद भारतीय चिंतन की वह समन्वयवादी दृष्टि है जो मनुष्य को केवल आर्थिक इकाई नहीं बल्कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा से बने समग्र अस्तित्व के रूप में देखती है। यह दर्शन व्यक्ति, समाज, संस्कृति और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करते हुए विकास को समग्र रूप में समझने की प्रेरणा देता है।

राजनीति में ‘काम कर दिया’ की संस्कृति : विरोध, तमाशा और लोकतंत्र की गिरती मर्यादा

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 11, 2026 समसामयिकी 0

एआई समिट के बाद राहुल गांधी के बयान से उठे विवाद ने केवल एक राजनीतिक बहस को नहीं जन्म दिया, बल्कि यह भी उजागर किया कि भारतीय राजनीति में विरोध और व्यवधान के बीच की रेखा कितनी धुंधली होती जा रही है। क्या लोकतंत्र में असहमति अब प्रदर्शन और सुर्खियों का खेल बनती जा रही है?

रक्तरंजित रणांगन का रुदन:ईरान पर उन्मादपूर्णआक्रमण के नौ दिन

Dr Shailesh Shukla Mar 8, 2026 समसामयिकी 0

मध्य पूर्व में छिड़ा ईरान-अमेरिका-इज़राइल संघर्ष केवल एक सैन्य टकराव नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, कूटनीति और मानवीय संकट को गहराई से प्रभावित करने वाला भू-राजनीतिक तूफान बन चुका है।

एप्सटीन फाइल्स: सत्ता, सेक्स और नैतिकता का गहरा अंधकार

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 28, 2026 News and Events 1

एप्सटीन फाइल्स केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उस मानसिकता का आईना हैं जो शक्ति और धन के शिखर पर बैठकर खुद को अजेय मान बैठती है। यह लेख सत्ता, सेक्स और नैतिकता के जटिल संबंधों को मनोवैज्ञानिक और सामाजिक संदर्भ में परखता है।

कीमतें आसमान नहीं छू रहीं—असल में हमारी मान्यताएँ उछल रही हैं।

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 10, 2026 समसामयिकी 0

सोना कोई उपयोगी वस्तु नहीं, बल्कि मानव आकांक्षाओं और असुरक्षाओं का सबसे चमकदार प्रतीक है। न वह भूख मिटाता है, न ठंड से बचाता है, फिर भी सदियों से उसे सबसे अधिक मूल्य दिया गया। इस लेख में सोने की बढ़ती कीमतों को बाज़ार की चाल नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक मान्यताओं का परिणाम बताया गया है। कैसे हमने सोने को सम्मान, सुरक्षा, प्रतिष्ठा और विश्वास का पर्याय बना दिया—और बाज़ार ने इन्हीं भावनाओं को भुनाना सीख लिया। मंदिरों, बैंकों और आभूषणों में सिमटे सोने के माध्यम से यह रचना भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और अर्थव्यवस्था के अंतर्संबंधों पर गहन वैचारिक दृष्टि डालती है। यह लेख सोने से ज़्यादा मानव मन की कीमत पर सवाल उठाता है।