रक्तरंजित रणांगन का रुदन:ईरान पर उन्मादपूर्णआक्रमण के नौ दिन

रक्तरंजित रणांगन का रुदन: ईरान पर उन्मादपूर्ण आक्रमण के नौ दिन 

ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध का नौवां दिन मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए एक नया और भयावह खतरा बन चुका है, जहां अमेरिका  और इज़राइल ने ईरान के तेल डिपो, रिफाइनरी और सैन्य ठिकानों पर हमले तेज कर  दिए हैं, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक शांति पर गहरा संकट मंडरा रहा है। इस संघर्ष की जड़ें बेहद गहरी हैं, जो 2023 के मध्य पूर्व संकट से शुरू होकर  2025 के बारह दिवसीय युद्ध तक फैली हुई हैं, जिसमें ईरान के प्रमुख परमाणु  सुविधाओं पर अमेरिकी हवाई हमलों ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया था,  जिसके परिणामस्वरूप ईरानी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा और अंतरराष्ट्रीय  समुदाय में परमाणु प्रसार की बहस तेज हो गई। 28 फरवरी 2026 को औपचारिक रूप से शुरू हुए इस युद्ध में इज़राइल और अमेरिका  ने तेहरान, इस्फहान, क़ुम, कराज जैसे विभिन्न प्रमुख शहरों में सैन्य ठिकानों,  सरकारी भवनों और ऊर्जा अवसंरचना पर संयुक्त  हवाई हमले किए, जिनमें ईरानी  सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई की हत्या सबसे  चौंकाने वाली घटना साबित हुई, जिसने ईरान के नेतृत्व को गहरे संकट में डाल दिया  और आंतरिक अस्थिरता को बढ़ावा दिया। ईरान ने तत्काल जवाबी कार्रवाई में  इज़राइल के प्रमुख शहरों और अमेरिकी सैन्य  ठिकानों पर सैकड़ों ड्रोन,  क्रूज़ मिसाइलें और बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं,  जिसका असर क्षेत्रीय सहयोगी  देशों जैसे कतर, बहरीन, यूएई, कुवैत, इराक,  जॉर्डन और सऊदी अरब पर पड़ा,  जहां इन हमलों ने नागरिकों को भयभीत कर  दिया और हवाई अड्डों तथा बंदरगाहों  को बंद करने पर मजबूर कर दिया। आज के ताजा अपडेट्स के अनुसार, इज़राइल  ने तेहरान के पास स्थित शेयान तेल  डिपो पर सीधा हमला किया, जिससे भयंकर  आग लग गई और काला धुआं आकाश  को ढक लिया, जबकि ईरानी इस्लामिक  रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स (IRGC) ने ” ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस” की 11वीं लहर में  इज़राइल के हाइफा शहर की रिफाइनरी  को निशाना बनाया। कुल मौतों का आंकड़ा 1,332 से अधिक हो चुका है, जिसमें ईरानी नागरिकों की  संख्या प्रमुख है, जबकि अमेरिकी और इज़राइली पक्षों ने सटीक हानि के आंकड़े  जारी नहीं किए हैं, हालांकि ईरानी दावों के अनुसार बहरीन में अमेरिकी नौसेना के  पांचवें बेड़े पर हमले में 200 से अधिक सैनिक मारे ग

यह युद्ध केवल एक सैन्य टकराव नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला,  अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की पूर्ण विफलता और मानवीय संकट का जीवंत प्रतीक  बन चुका है, जहां ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर दिया,  जिसके फलस्वरूप 150 से अधिक फ्रेट जहाज रुके पड़े हैं, तेल और गैस शिपमेंट  पूरी तरह बाधित हो गए हैं और वैश्विक तेल कीमतें प्रति बैरल 120 डॉलर के पार पहुंच गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक तरफ ईरान को “हार गया” घोषित करते हुए कहा कि वह “बहुत कड़ा प्रहार” झेलेगा और “ईरान अब मिडिल ईस्ट का  बदबूदार नहीं रहा”, लेकिन दूसरी ओर ईरान ने दुबई के मरीना टावर, अबू धाबी  और दोहा जैसे आर्थिक केंद्रों पर जवाबी हमले किए, जिससे खाड़ी क्षेत्र की  अर्थव्यवस्थाएं हिल गईं। इस संघर्ष की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझना  आवश्यक है; 1979 की  इस्लामी क्रांति के बाद अमेरिका-ईरान संबंध लगातार तनावपूर्ण बने रहे,  जिसमें 1953 के अमेरिकी समर्थित तख्तापलट, 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध में अमेरिका द्वारा सद्दाम हुसैन को हथियारों और खुफिया सहायता  प्रदान करना, और 2020 में क़ासिम सुलेमानी की ड्रोन हत्या जैसी घटनाएं  शामिल हैं, जिन्होंने ईरानी जनता में गहरी शत्रुता पैदा की। ईरान का “एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस” – जिसमें हिज़बुल्लाह, हमास, हूती विद्रोही और इराकी शिया मिलिशिया सम्मिलित हैं – इस युद्ध का प्रमुख केंद्र बिंदु रहा है, जिसने इज़राइल के खिलाफ  प्रॉक्सी युद्ध को ईंधन प्रदान किया। जनवरी 2026 में ईरानी सुरक्षा बलों  द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई क्रूर  कार्रवाई में हजारों नागरिक मारे गए, जिसके प्रत्यक्ष परिणामस्वरूप  अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सबसे बड़ी सैन्य तैनाती की, जिसमें 50,000 से अधिक सैनिक, USS अब्राहम लिंकन, जेराल्ड आर. फोर्ड और जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश जैसे  विमानवाहक पोत शामिल हैं। परमाणु मुद्दा इस संघर्ष का एक महत्वपूर्ण  आयाम है; अंतरराष्ट्रीय परमाणु  ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने पुष्टि की है कि ईरान के पास 460 किलोग्राम  60% तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है, जो सैद्धांतिक रूप से 11  परमाणु बम बना सकता है, हालांकि IAEA ने किसी संगठित हथियार कार्यक्रम के प्रमाण की पुष्टि नहीं की है।

आज के घटनाक्रमों ने इस युद्ध को और अधिक जटिल तथा अप्रत्याशित बना  दिया है, जहां अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार नौवें दिन अमेरिका-इज़राइल गठबंधन ने ईरानी सैन्य ईंधन स्टोरेज और रिफाइनरी को प्राथमिक  निशाना बनाया, जिसके जवाब में IRGC ने इज़राइल पर नई मिसाइल लहरें  दागीं और खाड़ी देशों जैसे कुवैत, कतर, सऊदी अरब तथा यूएई पर ड्रोन हमले किए। ट्रंप का बयान कि ईरान “पीछे हटने वाला नहीं है” राजनीतिक बयानबाजी का  हिस्सा लगता है, क्योंकि सैटेलाइट इमेजेस से ईरानी सैन्य बेसों को गंभीर क्षति  तो हुई है, लेकिन पूर्ण विनाश नहीं हुआ, और ईरान ने जॉर्डन पर 100 से अधिक मिसाइल-ड्रोन हमले किए, जिनमें से केवल 14 इंटरसेप्ट हो सके, जिससे अमेरिकी  THAAD एयर डिफेंस सिस्टम को नुकसान पहुंचा। इस युद्ध ने वैश्विक  अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई है; कतर की रास  लफ्फान गैस सुविधा पर हमलों से LNG शिपमेंट रुक गए, तेल कीमतों में  उछाल आया और स्टॉक मार्केट्स में भारी गिरावट दर्ज की गई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आपात बैठक बुलाई, जहां रूस, चीन  और कई अन्य देशों ने अमेरिका-इज़राइल हमलों की निंदा की, इसे  ईरान की संप्रभुता का घोर उल्लंघन करार दिया। ईरान के अंतरिम  नेतृत्व ने विद्रोही समूहों को चेतावनी जारी की है, लेकिन

Dr Shailesh Shukla

Dr Shailesh Shukla

राजभाषा अधिकारी, एनएमडीसी लिमिटेड [भारत सरकार का उद्यम] हीरा खनन…

राजभाषा अधिकारी, एनएमडीसी लिमिटेड [भारत सरकार का उद्यम] हीरा खनन परियोजना, मझगवाँ, पन्ना (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए.(हिंदी), एम.ए.(जनसंचार), पीएचडी प्रकाशन : भारत सहित विश्व के अनेक देशों से प्रकाशित विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं - अस्मिता, राजभाषा भारती,

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