ब्लडी रेटिंग्स ‘Zwigato’ में गिग वर्ल्ड की सच्चाई

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 8, 2025 Cinema Review 0

‘Zwigato’ एक गिग-इकॉनॉमी राइडर की रोज़मर्रा की जद्दोजहद का सधी हुई, मानवीय चित्रपट है—जहाँ ऐप का एल्गोरिदम नई फैक्ट्री है, रेटिंग नया ठप्पा, और बारिश में भी चलती है रोज़ी-रोटी की बाइक। कपिल-शाहाना की बिना शोर वाली अदाकारी बेरोज़गारी, शोषण और शहरी पलायन की सच्चाइयों को नरमी से काटती है।

तीनों खगोलीय पिंडों की त्रिमूर्ति : पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य की खगोलीय लीलाएं

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 8, 2025 शोध लेख 0

सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण सिर्फ़ खगोल नहीं, बल्कि खगोलीय कॉमेडी भी हैं। सूर्य बॉस की तरह, पृथ्वी मैनेजरनी और चंद्रमा नखरेबाज़ कवि की तरह बर्ताव करता है। इनकी शक्ति, आकार और वजन जब आपस में भिड़ते हैं, तो ग्रहण बनता है मानो आसमान में ब्रह्मांडीय नौटंकी का लाइव शो!

रायता पुराण : रायता फ़ैल गया

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 3, 2025 व्यंग रचनाएं 2

“रायतपुराण” भोजन-संस्कृति का हास्य-व्यंग्यात्मक आख्यान है। सागर-मंथन से जन्मा यह दधि-व्यंजन कभी पंगत का गौरव था, तो आज बुफ़े की प्लेट के कोने में सहमा पड़ा है। कभी भूखे बारातियों का उद्धार करता, तो कभी फूफा के हाथों विवादों में फैलाया जाता। अब यह थालियों से निकलकर सोशल मीडिया की दीवारों पर अफ़वाहों और राजनीति का प्रतीक बन चुका है।

From Abhāv (Scarcity) to Prabhāv (Influence) – And Yet, the Heart Remains Sad

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 2, 2025 English-Write Ups 0

Forty years ago, happiness was cheap. A stick could be toy, antenna, and mango-harvesting tool. A single roll of cloth dressed the whole family—eventually turning into bags and mops. Doordarshan’s Ramayan was a divine weekly event, while sugar toys were both playthings and sweets. Today, despite endless gadgets and choices, smiles feel mortgaged. The old equation still rings true: fewer resources, more joy; more resources, less joy.

क्या पापा – लोल – “लोल हो गया संवाद”

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 2, 2025 व्यंग रचनाएं 2

डिजिटल युग की हंसी अब मुँह से नहीं, मोबाइल से निकलती है। पिता ‘LOL’ सुनकर असली हंसी देखना चाहते हैं, जबकि बेटा ‘BRB’, ‘ROFL’, ‘IDK’ जैसे कोड में ही भावनाएँ व्यक्त कर देता है। व्यंग्य यह है कि असली संवाद खो गया है और अब हंसी भी इमोजी व शॉर्टकट पर आउटसोर्स हो गई है। यही है हमारी पीढ़ियों का नया “लाफ्टर क्लब”—ऑनलाइन!

राजा भर्तृहरि : श्रृंगार से वैराग्य तक की जीवनयात्रा

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 1, 2025 Important days 2

कभी मुकुट और महल के स्वामी रहे भर्तृहरि, अंततः साधु की लाठी और तप की गहनता में लीन हो गए। उनकी कथा सिखाती है—श्रृंगार मोहक है, नीति स्थिर है और वैराग्य शाश्वत। यही त्रिवेणी है उनका शतक, जो आज भी जीवन के सत्य का दर्पण है।

दीवारों का कैनवास और-दीवारें फिर बोल उठी -हास्य व्यंग्य रचना

डॉ मुकेश 'असीमित' Aug 31, 2025 व्यंग रचनाएं 0

“दीवारों का कैनवास और-दीवारें फिर बोल उठी  बचपन में ले चलता हूँ… क्या करूँ, सारी मीठी यादें तो बचपन के पिटारे में ही रह गईं। बिल्कुल उसी दादी माँ के पिटारे की तरह, जिसे हम उनकी नज़रों से बचाकर उत्सुकतावश खोल ही लेते थे। मन में कौतूहल—आख़िर दादी इस पिटारे में क्या छुपाकर रखती हैं? […]

काम करने वाला कोई नहीं घर में-satire-humor

डॉ मुकेश 'असीमित' Aug 30, 2025 Blogs 0

मरीज की असली तकलीफ़ टूटी हुई हड्डी नहीं, बल्कि टूटा हुआ घर-गृहस्थी का संतुलन है। डॉक्टर जब पक्का प्लास्टर लगाने का हुक्म सुनाता है तो लगता है जैसे घर में आपातकाल लागू कर दिया हो। मरीज की गुहार–“डॉक्टर साहब, घर में कोई काम करने वाला नहीं!”–अब डॉक्टर के लिए नए बिज़नेस का आइडिया बन चुकी है। बेसिक, गोल्डन और प्रीमियम पैकेज समेत!

मम्मी रिटर्न्स: ए सी कोच एडिशन-हास्य व्यंग्य रचना

डॉ मुकेश 'असीमित' Aug 29, 2025 व्यंग रचनाएं 0

*"ए.सी. डिब्बे की यात्रा कई बार हॉरर फिल्म जैसी लग सकती है। सफेद चादर ओढ़े यात्री ममी जैसे लगते हैं, और चौकीदार हाथ में लालटेन लिए किसी भूतहा हवेली का गार्ड प्रतीत होता है। मोबाइल की टॉर्च से सीट नंबर खोजना किसी रहस्यमयी लिपि पढ़ने जैसा अनुभव बन जाता है। सच मानिए, 'मम्मी रिटर्न्स: ए.सी. कोच एडिशन' किसी भी थ्रिलर मूवी को मात दे सकती है।"*