आराम करो –आराम में ही राम बसा है-हास्य-व्यंग्य डॉ मुकेश 'असीमित' August 22, 2025 हास्य रचनाएं 3 Comments भागम-भाग की ज़िंदगी का असली गणित है—भाग को भाग दो, और उत्तर आएगा ‘आराम’। खाट पर लेटना, कम्बल में दुनिया की फिक्र लपेटना ही असली… Spread the love
The Philosophy of “Purushkaar” (Award-ism) डॉ मुकेश 'असीमित' August 21, 2025 Satire 0 Comments The hunger for awards has turned into a literary disease—treated at roadside “Purushkaar stalls” like quack clinics. A writer without an award looks impotent; with… Spread the love
अफ़सर अवकाश पर है-हास्य-व्यंग्य रचना डॉ मुकेश 'असीमित' August 21, 2025 व्यंग रचनाएं 0 Comments सरकारी दफ़्तरों की असलियत पर यह व्यंग्य कटाक्ष करता है—जहाँ अफ़सर तनख़्वाह तो छुट्टियों की लेते हैं, पर काम के नाम पर बहानेबाज़ी ही उनका… Spread the love
राजनीति के बम-व्यंग्य रचना Prahalad Shrimali August 20, 2025 व्यंग रचनाएं 0 Comments राजनीति के बम बड़े ही विचित्र होते हैं। असली बम बेचारे जबरन फोड़े जाते हैं, लेकिन राजनीति के बम तो खुद फटने को मचलते हैं।… Spread the love
“Pin the Saree, Please” – A Satirical Tale डॉ मुकेश 'असीमित' August 19, 2025 Humour 0 Comments In our home, “Can you pin my saree?” is not just a request—it’s the official ceasefire declaration after a husband-wife war. Pinning sarees for 26… Spread the love
The Tragic Tale of a Desire-Humour-Satire डॉ मुकेश 'असीमित' August 18, 2025 Satire 2 Comments “For ten days, I’ve been suffocating in the minister’s trash bin, buried under countless petitions. I was born as a ‘desire,’ a letter of hope,… Spread the love
“आज़ादी के दिन का अधूरा सपना”-लघु कथा Wasim Alam August 16, 2025 लघु कथा 4 Comments “15 अगस्त के उत्सव में झंडे लहरा रहे थे, गीत बज रहे थे, लेकिन गांधी मैदान के किनारे नंगे पाँव बच्चे लकड़ी समेट रहे थे।… Spread the love
आवारा कुत्तों का लोकतंत्र-व्यंग्य रचना Vivek Ranjan Shreevastav August 16, 2025 व्यंग रचनाएं 0 Comments “शहर की गलियों में लोकतंत्र आवारा कुत्ते के रूप में बैठा है। अदालत आदेश देती है, नगर निगम ठेका निकालता है, मोहल्ला समिति बहस करती… Spread the love
माखन लीला-हास्य व्यंग्य रचना डॉ मुकेश 'असीमित' August 16, 2025 व्यंग रचनाएं 0 Comments कृष्ण की माखन लीला आज लोकतंत्र में रूप बदल चुकी है। जहाँ कान्हा चोरी से माखन खाते थे, वहीं आज सत्ता और समाज में सब… Spread the love
एक चिट्ठी भारत माँ के नाम Neha Jain August 14, 2025 Blogs 2 Comments भारत माँ को लिखी बेटी की भावनात्मक चिट्ठी, जिसमें अतीत के गौरवशाली भारत और वर्तमान की विडंबनाओं का तुलनात्मक चित्रण है। वीरता, सांस्कृतिक सौहार्द और… Spread the love