जीवन पर प्रकाश डालिए-हास्य व्यंग्य रचना

Pradeep Audichya Jul 14, 2025 व्यंग रचनाएं 4

सेठजी को अब ‘सेठ’ होने से संतोष नहीं, उन्हें ‘समाजसेवी’ भी बनना है—वो भी बिना समाज की सेवा किए! अखबार, होर्डिंग, माला और माइक की व्यवस्था है, गाय तक बुलवाई गई है फोटो के लिए। जीवन पर प्रकाश डालते मास्टर साहब बिजली चोरी, मंदिर पर कब्ज़ा और गरीबों की "सुरक्षा" के किस्से खोल देते हैं। मुनीम तुरंत टोका — “अब ज्यादा प्रकाश ठीक नहीं है।”

कालीधर लापता — एक आधी-अधूरी भावुकता की खोज-फ़िल्म समीक्षा

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 14, 2025 Cinema Review 2

कालीधर लापता में कुंभ मेला बनारस के घाटों तक सिमट गया, अल्ज़ाइमर से पीड़ित किरदार अंग्रेज़ी बोलने लगा, और एक मासूम बच्चा शराब का इंतज़ाम करता दिखा! इन विसंगतियों ने कहानी की संवेदनशीलता को झकझोर दिया। फिल्म भावनात्मक हो सकती थी, पर बेमेल दृश्यों और स्क्रिप्ट की भूलों ने इसके असर को कमज़ोर कर दिया।

मेरी बे-टिकट रेल यात्रा-यात्रा संस्मरण

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 14, 2025 संस्मरण 2

हॉस्टल की 'थ्रिल भरी' दुनिया से निकली एक रोमांचक रेल यात्रा की कहानी, जहाँ एक मेडिकल छात्र पुरानी आदतों के नशे में बिना टिकट कोटा पहुँचने की जुगत भिड़ाता है। कभी पचास के खुले न मिलने की मजबूरी, कभी टीटी से आँख-मिचौली, तो कभी जनरल डिब्बे में ‘इंच भर की सीट’ पर संतुलन साधना — हर दृश्य हास्य से लबरेज़ है। डर की कई 'किश्तों' के बीच चलती ट्रेन में 'किक' का अहसास, और आखिर में स्टेशन पर छलांग मारकर जीत का रोमांच। एक बेधड़क, बेपरवाह, लेकिन दिलचस्प रेल यात्रा — सिर्फ़ व्यंग्य की भाषा में!

व्यंग्य चिंतन में मुंगेरीलाल

Prahalad Shrimali Jul 13, 2025 व्यंग रचनाएं 1

मुंगेरीलाल केवल एक चरित्र नहीं, हर आम आदमी की अंतरात्मा है जो कठिन यथार्थ के बीच भी सुनहरे सपने देखता है। वह न पाखंडी है, न अवसरवादी—बल्कि एक ऐसा मासूम है जो बिना किसी प्रचार के देश की खुशहाली का सपना पालता है। उसकी दुनिया रंगीन जरूर है, लेकिन अहिंसक, नेकनीयत और हानिरहित है। ऐसे मुंगेरीलाल देश पर बोझ नहीं, बल्कि भावना के सच्चे वाहक हैं।

Numbers Speak, You See!

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 12, 2025 English-Write Ups 0

Numbers don’t lie—unless they’re told to! Donated blood once—now in a report, I donated four times! Chitragupta did it for dharma, NGOs do it for drama. Graphs are sexy; the truth is not. Elections are won more by numbers than by people.

The Poor Man Surrounded by Questions

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 12, 2025 English-Write Ups 1

A man’s life is a cycle of questions—“Did you eat?”, “How’s the job?”, “Do you love me?”—and no answer ever sets him free.

गुरु गुड ही रहे चेला चीनी हो गए-हास्य-व्यंग्य

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 10, 2025 व्यंग रचनाएं 2

गुरु अब ज्ञान के प्रतीक नहीं, शॉर्टकट और टिप्स देने वाले बाज़ारू ब्रांड बन चुके हैं। चेला बनना खतरे से खाली नहीं, क्योंकि हर चेला गुरु बनने की फिराक में है। गुरु-शिष्य परंपरा अब कोर्ट-कचहरी, दलाली, और सट्टे की दुनिया में ‘गुरु मंत्र’ से ज़्यादा ‘टिप्स मंत्र’ में बदल चुकी है।

देव सो रहे हैं और आम आदमी पिट रहा है….? व्यंग्य

Sunil Jain Rahee Jul 8, 2025 व्यंग रचनाएं 5

जब देव सोते हैं तो देश की नींव भी ऊंघने लगती है। जनता, बाबू, साहब और चपरासी सब अपनी-अपनी तरह से नींद का महिमामंडन करते हैं। जागने की ज़िम्मेदारी बस सेना और कुछ अदृश्य प्रहरी निभाते हैं। इस नींद में सत्ता फलती है, और जनहित सो जाता है।

अब ए.आई. भी ‘आई’ बन सकती है!-हास्य व्यंग्य

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 8, 2025 व्यंग रचनाएं 4

ए.आई. अब सिर्फ इंटेलिजेंस नहीं, अब वह 'आई' भी है! तकनीक की इस नई छलांग में अब प्रेम, गर्भ और पालन-पोषण भी कोडिंग से संभव है। रोबोट अब लैब में पालना झुला रहे हैं और इंसान हैरत से देख रहे हैं — यह भविष्य है या व्यंग्य! इस लेख में तकनीक और परवरिश का अद्भुत संगम दिखाई देता है — मानो ‘माँ’ अब मशीन बन गई हो।

ये फिक्रमंद लोग-हास्य व्यंग्य

Sanjaya Agrawal 'Mradul' Jul 6, 2025 व्यंग रचनाएं 1

यह रचना आज के 'व्हाट्सएप्प ज्ञानियों' पर करारा व्यंग्य है, जो ब्रह्म मुहूर्त में ही टॉयलेट से लेकर तहज़ीब तक ज्ञान बाँटने निकल पड़ते हैं। फॉरवर्ड्स, वीडियो लिंक, भक्ति संदेश और कविताओं से समाज की चेतना बढ़ाने का ज़िम्मा इन्हीं सज्जनों पर है — चाहे फ़ोन हैंग हो जाए या दिमाग।