भारत की बेटियाँ: एक राग, एक विजय — Women’s ICC Champions

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 3, 2025 India Story \बात अपने देश की 0

“कप्तानों से बढ़कर, यह जीत उन सपनों की है जो साथ दौड़ते हैं—एक राग, एक भारत।” “जब विविध सुर मिलते हैं, जीत का आलाप अपने आप जन्म लेता है—भारत विश्वविजेता।” “साहस, संयम और संगति—इन्हीं तीन रंगों से तिरंगा ट्रॉफी छू लेता है।”

नोबेल, भारतीय लेखक और वैश्विक संवाद की सीमाएँ

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 16, 2025 शोध लेख 0

“भारतीय साहित्य में गहराई की कमी नहीं, पर संवाद और अनुवाद की दीवार उसे वैश्विक कानों तक पहुँचने नहीं देती। नोबेल से बड़ा है वह शब्द जो सीमाएँ लांघ जाए।”

‘डिजिटल इंडिया’ से ‘डिजिटल असमानता’ तक : क्या सबको मिल रहा है बराबरी का लाभ?

Dr Shailesh Shukla Jul 29, 2025 समसामयिकी 1

डिजिटल इंडिया के दस वर्षों बाद, आज़ादी और समानता का वादा अधूरा प्रतीत होता है। ग्रामीण भारत अब भी डिजिटल संसाधनों की कमी, तकनीकी अक्षमता और भाषा बाधाओं से जूझ रहा है। सरकारी ऐप्स और योजनाएं केवल कागज़ों में प्रभावी हैं, ज़मीनी स्तर पर आमजन तकनीकी अंधेरे में हैं। क्या यह समावेशी सशक्तिकरण है या डिजिटल बहिष्करण?

“कारगिल विजय दिवस 2025 – नई पीढ़ी के लिए शौर्यगाथा का संदेश”

Poonam Chaturvedi Jul 26, 2025 Important days 0

"अगर आप चाहें, तो इतिहास रच सकते हैं; लेकिन अगर आप चाहें कि पीढ़ियाँ उसे याद रखें, तो उसे अपने लहू से लिखना होगा।" कारगिल केवल युद्ध नहीं, चेतना का पुनर्जागरण था। कारगिल विजय दिवस — स्मरण से आगे, राष्ट्रधर्म का अभ्यास।

“उपराष्ट्रपति का इस्तीफ़ा – लोकतंत्र की चुप्पी में एक तेज़ दस्तक” 

Poonam Chaturvedi Jul 24, 2025 समसामयिकी 0

उपराष्ट्रपति का इस्तीफा सिर्फ एक पद त्याग नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के संतुलन में आए गहरे असंतोष का संकेत है। यह घटना नीतिगत असहमति, राजनीतिक पुनर्संरेखण या वैचारिक टकराव का प्रतिनिधित्व कर सकती है। ऐसे समय में संविधान, संसद और जनविश्वास की स्थिरता का मूल्यांकन आवश्यक हो जाता है। यह इस्तीफा लोकतंत्र की जड़ों को झकझोरने वाली घटना बन जाता है।

जल संकट : टिकाऊ प्रबंधन की अनिवार्यता

Dr Shailesh Shukla Jul 24, 2025 समसामयिकी 1

भारत में जल संकट गहराता जा रहा है। 18% जनसंख्या के बावजूद भारत के पास मात्र 4% जल संसाधन हैं। जलवायु परिवर्तन, अति-दोहन और नीतिगत असफलताओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दिल्ली, बेंगलुरु जैसे शहर "डे ज़ीरो" झेल चुके हैं। प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता चिंताजनक स्तर तक घट चुकी है। अब यह केवल पर्यावरण नहीं, एक सामाजिक-राजनीतिक संकट बन चुका है।

भारत में सहकारिता का सशक्तिकरण और 2025 अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष

Poonam Chaturvedi Jul 23, 2025 समसामयिकी 0

संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2025 को 'अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष' घोषित किया जाना भारत के सहकारी आंदोलन के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। “सहकार से समृद्धि” की दृष्टि के साथ, भारत वैश्विक मंच पर अपनी भागीदारी दर्शा रहा है। नीतिगत सुधार, तकनीकी नवाचार, और सामुदायिक भागीदारी—ये तीन स्तंभ सहकारिता को सतत विकास की दिशा में सशक्त बनाएंगे।

हरियाली और विकास : क्या दोनों एक साथ संभव हैं?-समसामयिक लेख

Poonam Chaturvedi Jul 21, 2025 समसामयिकी 0

भारत में हरियाली और विकास की बहस पुरानी है। अक्सर आर्थिक तरक्की के नाम पर पर्यावरण की अनदेखी होती रही है। पर यह टकराव अनिवार्य नहीं। सही नीतियों, जन-जागरूकता और पर्यावरण-संवेदनशील विकास मॉडल के ज़रिए हरियाली और तरक्की दोनों संभव हैं। स्कैंडिनेवियाई देश इसका उदाहरण हैं, और भारत में भी ऐसी संभावनाएं बन रही हैं।