डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 6, 2026
Culture
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घर और मकान के अंतर पर आधारित यह विचारात्मक आलेख बताता है कि घर केवल भौतिक संरचना नहीं, बल्कि रिश्तों, स्मृतियों और अपनत्व की गर्माहट से निर्मित एक जीवित अनुभव है। जब तक उसमें अपने और अपनापन न हो, तब तक सबसे आलीशान मकान भी केवल एक खाली ढांचा रह जाता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 28, 2026
Lifestyle
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अकेलापन बीमारी नहीं, संकेत है—कि हम स्वयं से दूर हो गए हैं।”
“भीड़ में रहकर भी आदमी अकेला हो सकता है, और मौन में रहकर भी पूर्ण।”
“हम रिश्ते बनाते हैं—पर क्या हम स्वयं से भी रिश्ता बनाते हैं?”
“असली महामारी दूरी की है—दुनिया से नहीं, अपने ही अस्तित्व से।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 27, 2026
Fashion,Food and Traveling
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दुनिया में हर वर्ष अरबों जानवर भोजन के लिए मारे जाते हैं। केवल 10 मिनट में लाखों जीवन समाप्त हो जाते हैं। जब हमारे पास विकल्प हैं, तब हमारी जिम्मेदारी भी शुरू होती है। प्रश्न यह नहीं कि शेर क्या खाता है—प्रश्न यह है कि हम, एक सभ्य मानव के रूप में, क्या चुनते हैं?
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 14, 2026
India Story
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“पता है, कौन सा वीक चल रहा है?”
“विशेष वैलेंटाइन डिश” दिल के आकार में, पर स्वाद में विस्फोटक!
क्या भारत में वैलेंटाइन डे का उन्माद सच में कम हो रहा है?
अब सवाल यह है—दिल लाल रहेगा या बसंत पीला?
badk_anushka
Feb 9, 2026
Lifestyle
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यह लेख व्यक्तिगत वित्त की बुनियादी लेकिन ज़रूरी समझ को सरल हिंदी में प्रस्तुत करता है। इसमें वर्तमान आर्थिक स्थिति को समझने से लेकर कर्ज़ प्रबंधन, लक्ष्य निर्धारण, निवेश रणनीति, कार और घर जैसे बड़े फैसलों तक—हर विषय को व्यवहारिक उदाहरणों के साथ समझाया गया है। यह लेख उन सभी के लिए है जो पैसे को तनाव नहीं, साधन बनाना चाहते हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 6, 2026
India Story
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हम यूँ ही नहीं हैं—हम अरबों कोशिकाओं, लाखों वर्षों और अनगिनत संभावनाओं का जीवित प्रमाण हैं।
डीएनए सिर्फ़ जैविक संरचना नहीं, यह हमारी स्मृति, हमारे पूर्वजों और हमारे भविष्य का साझा दस्तावेज़ है।
जब अस्तित्व अपने आप में चमत्कार है, तो निरर्थक होने का प्रश्न ही कहाँ उठता है?
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 1, 2026
India Story
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नया साल कोई तारीख नहीं, भीतर की एक हल्की-सी हलचल है।
उत्सव का सवाल नहीं, चेतना का सवाल है।
जो छूट गया, वही नया है; जो थाम लिया, वही बोझ।
कैलेंडर बदलते रहते हैं, साल तभी बदलता है जब दृष्टि बदलती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 30, 2025
Lifestyle
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हम बच्चे के हाथ में खिलौना नहीं, भविष्य थमा देते हैं।”
“शरारत दोष नहीं, जीवन की पहली प्रयोगशाला है।”
“थोपे गए संस्कार अनुशासन पैदा करते हैं, चेतना नहीं।”
“गलती न करने का अभिनय, गलती करने से ज़्यादा अनैतिक है।”
“जिस बचपन में शरारत मर जाती है, उस जीवन में साहस कभी जन्म नहीं लेता।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Nov 22, 2025
Lifestyle
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श्रीमद्भगवद्गीता का पहला शब्द है “धर्म” और अंतिम “मम” – यानी पूरी कथा इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूमती है कि “मेरा धर्म क्या है?” धर्म यहाँ मजहब नहीं, हमारे मूल गुण, स्वभाव और जिम्मेदारी का नाम है। जब हम भीड़ और ट्रेंड के पीछे भागकर अपना स्वधर्म छोड़ देते हैं, तब बाहर से सफल दिखकर भी भीतर से खाली रह जाते हैं। गीता हमें सिखाती है कि कर्म पर अधिकार रखो, फल को प्रसाद मानो, अपने स्वभाव के अनुरूप काम करो और आज के आनंदित कर्म में ही सच्ची “सफलता” खोजो।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Oct 20, 2025
Important days
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“दीपावली अमावस्या की निस्तब्धता से जन्मी वह ज्योति है जो केवल घर नहीं,
हृदय की गुफाओं को आलोकित करती है।
यह बाह्य उत्सव से अधिक आत्मदीपकत्व का अनुष्ठान है —
अंधकार को मिटाने नहीं, उसमें दीप जलाने का साहस।”