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Category: Poems

श्री गणेश चतुर्थी अवसर पर पारम्परिक संस्कृतनिष्ठ वंदना श्लोक—गणपति को विघ्नहर्ता, पार्वतीसुत, मोदकप्रिय, सिद्धिदाता, बुद्धिप्रदाता और भक्तप्रिय रूप में स्मरण करते हुए स्तुति। चित्र में गजानन भगवान को दिव्य आभा और मोदक के साथ दर्शाया गया है।

गणेश चतुर्थी विशेष-स्तुति

गणेश चतुर्थी विशेष अवसर पर प्रस्तुत वंदना में गणपति को विघ्नहरण प्रथमेश्वर, पार्वतीसुत, मोदकप्रिय, गजवदन और सिद्धिदाता के रूप में नमन किया गया है। वे…

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A satirical cartoon showing a man sinking in water, tied down by heavy bundles labeled “Ego,” “Anger,” and “Greed,” while a dead body floats lightly beside him, symbolizing the irony of life’s burdens.

डूबने की फिलासफी-छंद रचना

डॉ. राम कुमार जोशी की कविता डूबने की फिलॉसफी जीवन के गहन व्यंग्य को सरल शब्दों में उभारती है। जीवित व्यक्ति काम-क्रोध-अभिमान के भार से…

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एक साधारण घर की दीवारें, जिन पर समय के भावनात्मक रंग चढ़े हैं — हंसी, आंसू, सपने, झगड़े, और मन की उलझनें, मानो वे सब कुछ देख-सुन रही हों।

मेरे घर की ये  दीवारें-कविता रचना

मेरे घर की दीवारें सिर्फ दीवारें नहीं, वे मेरी जिंदगी की साक्षी हैं। उन्होंने मुझे नाचते-गाते, रोते, सपने बुनते, सपनों के टूटने पर टूटते, झगड़ते,…

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एक मिनिमलिस्टिक अमूर्त चित्र जिसमें एक नाज़ुक लाल रक्षा सूत्र का धागा, एक प्रज्वलित मशाल के चारों ओर लिपटा है, पृष्ठभूमि में गहरे साये में छिपे भयावह पंजों की परछाइयाँ। धागा और मशाल मिलकर सुरक्षा और संकल्प का प्रतीक बनते हैं।

रक्षा सूत्र का प्रण-कविता रचना

रक्षा सूत्र का संकल्प सिर्फ परंपरा नहीं, यह भय के अंधेरों में जलती प्रतिज्ञा की मशाल है। नाज़ुक धागे में बंधा विश्वास, समाज की दरारों…

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"मायके की याद में भावुक स्त्री, पुराने आंगन और चौबारे को निहारती हुई।"

मुझको मेरा मायका दे दो-कविता रचना

यह कविता मायके की गहरी भावनात्मक यादों को समेटे हुए है। इसमें एक बेटी का अपने बचपन के आंगन, गली-चौबारे, पुराने नाम, प्यार-दुलार और पुरानी…

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दो पुराने दोस्त, अलग-अलग दिशाओं में जाते हुए, पीछे मुड़कर देखते हैं। एक कॉर्पोरेट पोशाक में, दूसरा मोबाइल में व्यस्त। उनके बीच धुँधली यादों की परछाइयाँ — स्कूल की यूनिफॉर्म, चाय की दुकान, हँसी के पल — हवा में तैरती हुई दिखाई देती हैं।

दोस्त बदल गए हैं यार-कविता रचना

समय की धारा में बहते हुए रिश्तों का यह मार्मिक चित्रण है — जहाँ कभी हँसी-ठिठोली, सपनों की साझेदारी और चाय की चौपाल थी, वहाँ…

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एक अमूर्त चित्र जिसमें एक धुंधली आकृति आईने में देख रही है, चेहरा स्पष्ट नहीं, पर मुस्कान विद्रूप है; पीछे टीवी स्क्रीन पर "Breaking News", और एक कैलेंडर की उलटी तारीखें दर्शाई गई हैं।

मैं झूठ की तलाश में हूँ-कविता रचना

यह कविता एक खोज है उस झूठ की, जिसे हमने सच मान लिया—जिसे प्रार्थनाओं, राष्ट्रगान, टीवी बहसों और भावनाओं में पवित्रता की तरह सजाया गया।…

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