मेरी हिन्दी -डा राम कुमार जोशी

Ram Kumar Joshi Jan 11, 2026 हिंदी कविता 2

“हिन्दी में बिन्दी की महत्ता, ज्यों खोजे गहराती है।” “तुलसी मीरा सूर कबीरा, अलख जगाई हिन्दी की।” “राजभाषा भले कहे हम, दोयम दर्जा थोप दिया।” “अभिमान करें अपनी थाती का, स्वभाषा का सम्मान करें।”

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 10, 2026 Poems 0

यह रचना हिंदी को “राजभाषा” के तमगे से बाहर निकालकर दफ़्तर, घर, गली और मनुष्य के बीच खड़ी दीवार पर सवाल करती है— क्या भाषा सिर्फ़ एक दिन का उत्सव है या रोज़ की साँस?

हवाओं से जंग और अज़्म की जीत

Shakoor Anvar Jan 8, 2026 गजल 0

तेज़ हवाओं और उग्र लहरों के बीच खड़ा मनुष्य जब हार मानने को होता है, तभी उसका अज़्म उसे जीवन की ओर लौटा लाता है। यह कविता द्वेष से मुक्त होकर, वफ़ा के सागर में एक नए जीवन-निज़ाम की कल्पना करती है।

हाथी का शोर और डोर की कविता

Ram Kumar Joshi Jan 5, 2026 हिंदी कविता 1

सम्मान, पुरस्कार और नोटों की थैलियों से सजे कवि सम्मेलन, जहाँ कविता की तलाश में गए श्रोता मसखरी लेकर लौटे। यह व्यंग्य उन बड़े नामों पर है, जिनकी आवाज़ भारी है और अर्थ हल्का।

अलविदा पच्चीस!-kavita-dr mueksh

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 31, 2025 हिंदी कविता 0

वर्ष पच्चीस एक ही नहीं था—वह हर व्यक्ति के लिए अलग निकला। कहीं हँसी थी, कहीं आँसू; कहीं खजाना भरा, कहीं खाली हाथ। यह कविता समय की उसी भीड़ को दर्ज करती है जहाँ हर जीवन अपना-सा सच लेकर चलता है।

मैं और मेरी हिंदी

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 26, 2025 हिंदी कविता 1

“मंच पर मैं फूलों में लिपटी हूँ, और व्यवहार में हाशिए पर सिमटी हूँ।” “‘राजभाषा’ कहलाती मैं, फिर क्यूँ हर वाक्य के बाद खिचड़ी सी हो जाती मैं।” “ये तालियाँ हैं या सिर्फ़ एक दिन का उत्सव—हिंदी दिवस।” “हमें हिंदी से मोहब्बत है—जीती-जागती, सुलगती, बोलती-लड़ती मोहब्बत!”

सकारात्मकता आत्म-उपहार

Prahalad Shrimali Dec 26, 2025 हिंदी कविता 0

“हमसे हर ओर उजाले हैं, क्योंकि हम दिलवाले हैं!” “चेहरे पर कोई चेहरा नहीं, जो हैं, हम हूबहू हैं वही!” “प्रेम हमारा जीवन सार, प्रकृति से करते हैं प्यार!” “अनुपम यह आत्म-उपहार, तुकबंदी भरे ये प्रिय उद्गार!”

ये आईना भी

Vidya Dubey Dec 13, 2025 हिंदी कविता 1

“टूटा आईना कभी दाग छुपा लेता है, कभी छुपे घाव दिखा देता है—एक ही प्रतिबिंब में बिखराव और आत्मबोध का सुंदर द्वंद्व।”