बीबी कहां छिटक गई
लल्लन के दिमाग में
दिल्ली नगर की छाप थी,
हवा में उड़ती ट्रेन और
रौनकें अपार थी।
ले चलें बीबी को अपने
सैर दिल्ली क्या हुईं,
उड़ गए जब होश उनके
बीबी कहां छिटक गई।
जेब जो अलग कटी
असबाब दिल्ली खा गई।
बहुत शोर सुनते थे हाथी की पूंछ का,
निकट आ के देखा तो डोर हिल रहीं थीं।
अप्रकाशित है ।
डा राम कुमार जोशी
Ram Kumar Joshi
Feb 11, 2026
हिंदी कविता
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