“दिन जाड़े के आये” हिंदी कविता

“दिन जाड़े के आये”
कुण्डली6चरण

दिन जाड़े के आ गये,सुवहा उठा कुहार,
अंग रजाई ना हटे,वाहर लगे फुहार,

वाहर लगे फुहार,कि इच्छा हुई खाने की,
गाजर हलवा गजक ,पकौडे भी पाने की,

“प्रेमी”गुड के संग,बाजरा रोटी खाये,
घी मिल जाये साथ,दिना जाडे के आये।

रचियता -महादेव प्रेमी

CANVAS AND PAPER PRINTS OF HANDMADE PAINTINGS
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Mahadev Prashad Premi

साहित्यिक नाम-महादेव प्रेमी जन्म स्थान-ग्राम परीता स्थाई पता- संजय कालोनी…

साहित्यिक नाम-महादेव प्रेमी जन्म स्थान-ग्राम परीता स्थाई पता- संजय कालोनी गर्ग होस्पीटल गंगापुर सिटी ,स0 मा0 (राज0)322201 मोबाईल 9667627720 संप्रति:चिकित्सा कर्मी कार्य क्षेत्र:चिकित्सा कार्य लेखन विधा-गजल,गीत,कविता और पहेली लेखन आदि प्रकाशन:(1)”बूझोबल” पहेली संग्रह प्राप्त सम्मान:कई सामाजिक व साहित्यिक सम्मान प्राप्त लेखनी उद्देश:सामाजिक विसंगतियों पर लिखना प्रेरणा पुञ्ज:स्वयम एवम अन्य लेखक रुचियां: साहित्य लेखन/अध्यापन

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