एक पत्थर की कहानी -कविता रचना

पत्थर हूं मैं ,एक मामूली सा पत्थर हूं मैं ,
छोटा हूं या बड़ा हूं मैं ,एक मामूली सा पत्थर हूं मैं ।

रास्ते का पत्थर हूं मैं,2
कोई मुझे बिछाता है ,
कोई मुझे ठुकराता है ।

मंदिरों का पत्थर हूं मैं ,2
कोई मुझे पूजता है ,
कोई मुझसे कूटता है ।

नदियों का पत्थर हूं मैं ,2
कोई मुझे संभालता है,
कोई मुझे संवारता है ।

पहाड़ों का पत्थर हूं मैं ,2
कोई मुझे तराशता है ,
कोई मुझे बिखेरता है ।

विद्या पोखरियाल  स्वरचित रचना 
बैकुंठपुर छत्तीसगढ़

Vidya Dubey

विद्या पोखरियाल ✍️ बैकुंठपुर छत्तीसगढ़

विद्या पोखरियाल ✍️ बैकुंठपुर छत्तीसगढ़

Comments ( 1)

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डॉ मुकेश 'असीमित'

6 months ago

bahut shandaar kavita