कस्बे में होली पर इकट्ठा होने वाली टोली में उम्र दराज, सेवानिवृत्ति, ओल्ड फ्रेंड ,शरीर से पस्त, मन से अनुभवी और हर चीज के इच्छुक ,बैसाखी से छुक-छुक चलने वाले, कुछ एक प्रशासनिक अधिकारी ,कुछ ,एसी रूम ,से बाहर निकले अधिकारी, तो कुछ सिग्नेचर पावर जाने से पावरलेस और चेहरे पर झुर्रियां सिलवटे, लेकिन उनका ध्यान हटाने के लिए ,डाई ,रंगे सुसज्जित बाल ,लगभग किसी के पास लघु ,तो किसी के पास दीर्घ अनुभव वाले टोली बनाकर होली खेलने के लिए अज्ञान चबूतरे पर इकट्ठा हुए ,तो कुछ ठिठोली करने लगे ,इस ठिठोली को बंद करते हुए ऐसे विभाग के पब्लिक रिलेशन ऑफिसर जिन्हें अपने ऑफिस के हर कार्यक्रम में पब्लिक को जोडने जिम्मा था बोले होली के त्यौहार को पब्लिक रिलेशन से जोड़ने के लिए अपने-अपने सुझाव दीजिए ,वे बोले उनका पब्लिक से रिलेशन था लेकिन जैसे ही रिटायर हुआ रिलेशन पर लोशन लग गया और मैं अकेला पड़ गया। जब अकेले पड़ने की बात सामने आई तो उम्र दराज में से कुछ बोले हमारे ऑफिस के बाॅस की घरवाली किसी के साथ ,हो ली, तो वे भी अकेले पड़ गए ! कुछ बोले हमारी ,भागवान ,भी भगवान के साथ हो ली तोअकेले हम भी हैं इसीलिए तो यह ,टोली ,होली पर अकेलेपन को दूर करने के लिए तैयार की है।
होली की टोली में शरीक अधेड़ की लाइन क्रॉस कर सीनियर सिटीजन बने लचकराम जी बोले ढलती उम्र की अनेक त्रासदियां है किसी को औलाद की तो किसी को परिवार जन त्रास देते हैं ,तो किसी की शारीरिक्त त्रास झेलने पड़ते हैं ।इस पर प्रोफेसर नंदलाल बोले घर परिवार में हम जैसे वृद्धो के साथ दूरी बना ली है। कईयों की दखलंदाजी दूर करने के लिए हाशिए पर धकेलते हैं।
इस पर साठ वसंत होली खेल चुके पंडित शिवनारायण जी बोले एक सर्वे में छपा था जिसमें उम्र दराज हाइपर फोबिया अस्थिरता के भाव तो किसी के नेत्रों की रोशनी गुल हो जाने से उनमें चिडचिडपन, उत्तेजना पाई जाती है ।ढलती उम्र पर पंडित जी के संवाद सुनकर सुनील भैया बोले उम्रदराजी के विकारों से छुटकारे के लिए तो होली की टोली बनाई है ताकि यह सारी बातें होली के दहन में शमन हो जाए ।
इस पर पेंशन से टेंशन की होली जला चुके भारतलाल जी बोले होली पर जब साठ ,सत्तर के उम्र चढे लोग डांस करेंगे ,हास परिहास करेंगे तो ढलती उम्र की कमर को कस देंगे ! वे बोले परंपराओं के रंगों से इस टोली में होली के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे है । इस पर इतिहास का बखान करने वाला अखिलेश जी बोले अलग-अलग इलाकों में किस्म किस्म की होली मनाई जाती है ।लेकिन यह टोली वाली होली ऐसे मनाई जिसमें गठबंधन सरकारों की तरह सबका सफल गठबंधन हो ।हम सब अलग-अलग इलाके में रहे हैं ,किसी ने ता उम्र मालवा में सरकारी होली भी जलती देखी है , हम में से अनेक सरकारी रहे इसलिए रंग ढुले सरकार का और उम्र दराज खेले होली ! इस तर्ज पर टोली को होली खेलना चाहिए। कई जगह होली रंग गुलाल से ज्यादा नाच और नाट्य के रंगत से मनाई जाती है, इस टोली में शरीक अनेक लोगों ने जिंदगी भर लोगों को कामकाज के नचाया वह अपने नाट्य प्रदर्शन से होली को यादगार बना सकते हैं। इस पर प्रोफेसर लक्ष्मण जी बोले बरसाना की लठमार होली को हम लोगों को नहीं मनाना है अन्यथा होली पर टूटी हड्डी जुड़ नहीं पाएगी ।इस पर बुद्धिजीवी किस्म के मेहताजी बोले होली पर हमारी बिरादरी का मूर्ख सम्मेलन आयोजित कर मूर्खों की टोली बनने का खिताब भी हम हासिल कर सकते हैं। और यह बात जरूर ध्यान रखना है कि हमें एलीफेंट, गंधर्व, हार्स फेस्टिवल वाली होली खेलना भी सीखना होगी । इस पर एक सीनियर बोले हम जैसे उम्रपार लोगों को सुरीली महफिले जमाना चाहिए, होली की राग रागिनी के साथ भांग के रस का रसास्वादन कर टोली के सदस्य घर पहुंचे तो बरसाना की होली की तर्ज पर घर की महिलाएं टोलीबाजों को स्त्री वेशभूषा पहना कर नचाए और होली की टोली ढलती उम्र की जगह होली के जरिए विनोद का हिस्सा बनकर अपने उम्र के बंधन से किनारा कर सके !
Prem Chand Dwitiya
Mar 8, 2026
व्यंग रचनाएं
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डॉ मुकेश 'असीमित'
2 hours agoकस्बाई जीवन की यह होली केवल रंगों की नहीं, बल्कि अनुभवों की होली है। उम्र के बोझ, रिश्तों की दूरियों और अकेलेपन को यह टोली हंसी-मजाक के रंगों से हल्का कर देती है। सच तो यह है कि जीवन की सबसे सच्ची होली वही है जिसमें लोग उम्र भूलकर साथ हंस सकें।