पटिया संस्कृति का पटाक्षेप !

पटिया संस्कृति का पटाक्षेप !

डॉ प्रेमचंद द्वितीय

चाहे महानगर हो या शहर ,कस्बे गांव की चौपाल हो पटिया पर बैठने वाले और पटियों पर ही डिस्कस कर पूरे इलाके में क्या हुआ ,क्या होने वाला है और क्या चल रहा है का मंथन किया जाता था ।और इस मंथन की खबर पूरे शहर में रात में वायरल हो जाती ,इन खबरों को भी वायरल करने वाले भी पटिए पर बैठे रहते थे और पटिया मीटिंग खत्म हो इसके पहले पटिया संस्कृति की पटकथा लिखी जा चुकी होती थी।
पटिया संस्कृति के संवाहक मेहता साब ने पटिया का उल्लेख करते हुए कहा कि पटिया संस्कृति पुरातन संस्कृति है। यह बड़े शहरों में रात को सराफा बाजार की गलियों में बंद दुकानों के पटिए पर बैठने वाले शौकीन हो चाहे धूप के साए में सड़क किनारे चाय के ठेले के समीप लगे पटियों पर जमा छोटी-मोटी महफिलों में चर्चाओं के दौर शुरू होते थे। देर रात तक पटिए गुलजार रहते थे, पटियों पर बैठने वालों की आवाजाही बनी रहती ,कईयो को जगह नहीं मिलती ।वही गांव में भेरुजी का ओटला, जादू सेठ की दुकान का पटिया, ज्ञान अज्ञान चबूतरा तो कहीं दुकानों को बंद होने के बाद खाली पटियों का इंतजार करते लोग पहुंच जाते थे ।वे बोले पटिया संवादों का केंद्र होते थे पूरे शहर की जानकारी का आदान-प्रदान ,लेनदेन होता था। पटिया पर बैठने वाले सरमाएदार से लेकर व्यवसायी, पढ़े लिखे ज्ञानी ,अज्ञानी, समाजसेवी राजनीति से जुड़े, पेंशनधारी ,बड़े बुजुर्ग ,राजनीति की जाजम बिछाने वाले, पहलवानी दाव पेंच जानने वाले विभिन्न वर्ग के लोग , गंगा जमुना तहजीब रखने वाले भी मौजूद रहते थे ।सर्दी में गर्मी का और गर्मी में ठंडी बाजार बहाने वाले पटियों पर मौजूद रहते थे। गजब के संदेश सद्भाव यहां मिलते थे। इस पर पंडित शिवनारायण जी बोले अब तो पटियों के पटिए उलाल हो गए हैं। पटियों पर सन्नाटा पसरा रहता है ।कोने में दुबके लोग मोबाइल में आंखें गाड़े रहते हैं वह कहते है पटियों पर जो बातें होती है वह इंटरनेट के दे रहा हैं। इंस्टाग्राम व्हाट्सएप ,फेसबुक पर सारी इन्फर्मेशन मिल जाती है तो हम पटिए क्यों तोड़े !अब तो गली मोहल्ले के कोनो में लोग बैठकर मोबाइल चलाते हैं और उसमें क्या जानकारी लेते देते हैं किसे पता ,किसी के चेहरे पर खुशी का भाव रहता है तो कोई उलझे हुए, टेंशन भरे चेहरे लेकर बैठे रहते हैं। उधर पटिया उलाल शब्द सुनकर सुनील भैया बोले पटियों के पट मोबाइल ले चटपट बंद कर दिए हैं ।अरे पहले पटिए पर कौन अफसर आ रहा है कौन जा रहा है कौन पार्टी में क्या चल रहा है ,किस विभाग में किसकी माथा पच्ची हुई, नगर में कब कौन सी कथा होने वाली है कौन सा सेल लगने वाला है कौन सा जादूगर आया है, किसने क्या कहा यहां तक की किसी के पटिया उलाल होने यानी दिवालिया होने तक की खबर पटियों पर लग जाती थी। पटिए पर चुनावी चर्चा जब जब चलती तो पालिका ही नहीं विधानसभा और लोकसभा के उम्मीदवारों के नाम भी पटियों पर तय होने की चर्चा होती ।यही नहीं जब पटिए से उठकर पटिया चर्चा करने वाले घर जाते तो सुबह पूरे शहर में जो जो घटित हुआ ,होने वाला है लोगों को पता चल जाता था क्योंकि पटिया पर मौजूद लोगों में दो चार. ऐसे रहते हैं जिन्हें पटियों की चर्चा फैलाए बगैर नींद नहीं आती ,खाना हजम नही होता ।जब पटिए की चर्चा चल रही थी तो गोवर्धन गुरु बोले अरे अब पटिए वटिए भूलो , बोल पटियों की जगह उसके शॉर्ट फॉर्म ,पट ,ने ले ली है ।नगर के सरकारी बिजली टेलीफोन के खंभें अब होर्डिंग, बैनर से ,पट, जाते हैं कई जगह अतिक्रमण से पट जाते हैं , और तो और जब जुलूस जलसा निकलता है तो सड़क फूलों से ,पट, जाती है।

पटिया संस्कृति के धूमिल होने पर चिंतित नरेंद्र स्वामी जी बोले चाहे पटिए है की पटकथा हो या अन्य कथा ,पट का अपना मर्तबा है ।घूंघट के पट से लेकर सौदे के, पट, जाने में ,पट , का महत्व है। खटपट, चटपट ,झटपट का ही अपना अलग अंदाज है ।प्रभावी लोगों की चित भी मेरी और पट भी मेरी होती है ।पटिया संस्कृति के उलाल होने में मोबाइल का अनूठा रोल रहा है ,बावजूद इसके पटिए का लघु रूप, पट,आज भी जलवा कायम किए हुए है । बगैर शिलापट के कार्यक्रम अधूरे लगते हैं, रजत पट भले ही बॉक्स में सिमट गए हो लेकिन वे भी वजूद लिए हुए हैं ।घरों के बाहर नाम पट, स्कूलों में श्याम पट मंदिर के पट आज भी खुलतेऔर बंद होते हैं ।कोई भी खेला या खेल चित्त पट के लिए सिक्का उछलता है किसी भी काम को पूरा करने के लिए खटपट करना पड़ती है। पट से कई पटनायक और पट वर्धन भी बन जाते हैं ।मियां बीवी के विवाद को हल करने के लिए एक दूसरे को पटाना पड़ता है। किसी भी प्रहसन, नाटक फिल्म ,बुक की पटकथा ही लिखनी पड़ती है ।बगैर पटकथा किसी के पटिए उलाल नहीं होते हैं ।चाहे वहपटिया संस्कृति हो या पट की खटपट हो सब चटपट हो जाता है !
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Prem Chand Dwitiya

Prem Chand Dwitiya

Address 34 पत्रकार कॉलोनी बडनगर 456 771 जिला उज्जैन म…

Address 34 पत्रकार कॉलोनी बडनगर 456 771 जिला उज्जैन म प्र है

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