तलाश है प्यार की पैट्रियाड मिसाइल की।

तलाश है प्यार की पैट्रियाड मिसाइल की।

कुरुक्षेत्र,
अक्षौहिणी सेनाओं का टकराव
महान, गीता का ज्ञान
अधर्म पर धर्म की जय ।

गागामेला ,
सिकंदर की प्यास
विश्व विजय की आस
यूनान का उदय, फारस का त्रास।

कलिंग,
अशोक का शोक
शस्त्र से शास्त्र की ओर देश
हृदय परिवर्तन, शांति का संदेश ।

तराईन, पानीपत, प्लासी ,
वाटरलू, पहला, दूसरा विश्व युद्ध
कपट, गुप्तचर, ताकत
संघर्ष ,झड़प, घात, प्रतिघात
अनवरत नई नई बिसात।

जिनके नाम पर है शांति पुरस्कार ,
उन्हीं नोबल का था आविष्कार
डायनामाइट ।
तोप , विस्फोट
शंखनाद, रणभेरी, दहाड़, टंकार, चीत्कार
अंततः वही सिसकी, दर्द, सीत्कार ।

युद्ध थोपता है कोई और
जान से हाथ धोकर
कीमत चुकाता आया है कोई और
जलती मशालें, धूल के गुबार
कूच , अल्ग़ार , वार,
शौर्य, वीरता, गद्दार,
कूटनीति की जीत, हार ।

रक्त सरिता, ध्वस्त मुकुट ,
नियति विकट
हर युद्ध का अंत , परिवर्तन
एक नया राज्याभिषेक,
बनता है हल , युद्ध भी कभी ।

लोग जो , मानते हैं
मानवता से ज्यादा ,
धर्म या अपना बनाया कायदा
देखते हैं जो सिर्फ फायदा

मैं यह सब अनुभव कर ,
पसीने से लतपथ छटपटाता हुआ हूं
बिस्तर पर ,
सिर्फ अपने कलम कागज के साथ
उसी पक्षी सा आक्रांत ,
जिसे देवदत्त ने
मार गिराया था
तीक्ष्ण बाणों से ।

सिद्धार्थ हो कहां ?
आओ बचाओ
इस तड़पते विश्व को
जो मिसाइलों
की नोक पर
लगे
परमाणु बमों से भयाक्रांत
है सहमा सा ।

युद्धोन्मादियों को समझा पाने को,
छोटी है मेरी कविता !
तलाश है मुझे
प्यार की ऐसी पैट्रियाड मिसाइल की,
जो , ध्वस्त कर सकती ,
नफरत की स्कड मिसाइलें ,
लोगों के दिलों में बनने से पहले ही

विवेक रंजन श्रीवास्तव
भोपाल

Vivek Ranjan Shreevastav

विवेक रंजन श्रीवास्तव ,वरिष्ठ व्यंग्यकार, स्वतंत्र लेखक ( हिंदी व…

विवेक रंजन श्रीवास्तव ,वरिष्ठ व्यंग्यकार, स्वतंत्र लेखक ( हिंदी व अंग्रेजी ) २८ जुलाई १९५९ में मण्डला के एक साहित्यिक परिवार में जन्म . माँ ... स्व दयावती श्रीवास्तव ...सेवा निवृत प्राचार्या पिता ... प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध ... वरिष्ठ साहित्यकार, कवि अनुवादक पत्नी ... श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव ... स्वतंत्र लेखिका इंजीनियरिंग की पोस्ट ग्रेडुएट शिक्षा के बाद विद्युत मण्डल में शासकीय सेवा . संप्रति जबलपुर मुख्यालय में मुख्य अभियंता के रूप में सेवा निवृत्त . परमाणु बिजली घर चुटका जिला मण्डला के प्रारंभिक सर्वेक्षण से स्वीकृति , सहित अनेक उल्लेखनीय लघु पन बिजली परियोजनाओ , १३२ व ३३ कि वो उपकेंद्रो , केंद्रीय प्रशिक्षण केंद्र जबलपुर आदि के निर्माण का तकनीकी गौरव . बिजली का बदलता परिदृश्य , जल जंगल जमीन आदि तकनीकी किताबें . हिन्दी में वैज्ञानिक विषयों पर निरंतर लेखन , हिन्दी ब्लागिंग . १९९२ में नई कविताओ की पहली किताब आक्रोश तार सप्तक अर्ध शती समारोह में भोपाल मे विमोचित , इस पुस्तक को दिव्य काव्य अलंकरण मिला .. व्यंग्य की किताबें रामभरोसे , कौआ कान ले गया , मेरे प्रिय व्यंग्य , धन्नो बसंती और बसंत , बकवास काम की , जय हो भ्रष्टाचार की ,समस्या का पंजीकरण , खटर पटर व अन्य प्रिंट व किंडल आदि प्लेटफार्म पर . समस्या का समाधान का अंग्रेजी अनुवाद किंडल पर सुलभ मिली भगत , एवं लाकडाउन नाम से सँयुक्त वैश्विक व्यंग्य संग्रह का संपादन . व्यंग्य के नवल स्वर , आलोक पौराणिक व्यंग्य का ए टी एम , बता दूं क्या , अब तक 75 , इक्कीसवीं सदी के 131 श्रेष्ठ व्यंग्यकार , 251 श्रेष्ठ व्यंग्यकार , निभा आदि अनेक संग्रहो में सहभागिता भगत सिंह , उधमसिंह , रानी दुर्गावती आदि महान विभूतियों पर चर्चित किताबें लिखीं हैं जलनाद नाटक संग्रह विश्ववाणी से राष्ट्रिय स्तर पर पुरस्कृत , हिन्दोस्तां हमारा , जादू शिक्षा का नाटक संग्रह चर्चित व म. प्र. साहित्य अकादमी से सम्मानित, तथा पुरस्कृत पाठक मंच के माध्यम से नियमित पुस्तक समीक्षक e - abivyakti के साहित्य सम्पादक म प्र साहित्य अकादमी ,पाथेय मंथन ,वर्तिका , हिन्दी साहित्य सम्मेलन , तुलसी साहित्य अकादमी व अनेक साहित्यिक़ संस्थाओं , से सम्मानित सामाजिक लेखन के लिये रेड एण्ड व्हाईट सम्मान से सम्मानित . वर्तिका पंजीकृत साहित्यिक सामाजिक संस्था के राष्ट्रीय संयोजक टी वी , रेडियो , यू ट्यूब , पत्र पत्रिकाओ में निरंतर प्रकाशन . व अन्य ब्लॉग संपर्क... ए २३३ , ओल्ड मिनाल रेजीडेंसी , भोपाल , म प्र , ४६२०२३

Comments ( 1)

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डॉ मुकेश 'असीमित'

48 minutes ago

यह कविता मानव इतिहास के युद्धप्रधान चरित्र को कुरुक्षेत्र, कलिंग, पानीपत, प्लासी और विश्व युद्धों जैसे उदाहरणों के माध्यम से प्रस्तुत करती है। कवि यह दर्शाता है कि चाहे युद्ध किसी भी कारण से लड़े गए हों—धर्म, सत्ता, विस्तार या विचारधारा—उनका अंतिम परिणाम पीड़ा, विनाश और मानवीय त्रासदी ही रहा है।

कविता का केंद्रीय बिंदु आधुनिक विश्व की वह स्थिति है, जहाँ परमाणु हथियारों और मिसाइलों की दौड़ ने मानवता को भय और असुरक्षा के चरम पर पहुँचा दिया है। ऐसे समय में कवि “प्यार की पैट्रियाड मिसाइल” का रूपक प्रस्तुत करता है—एक ऐसी कल्पनात्मक शक्ति, जो नफरत, हिंसा और युद्ध की मानसिकता को प्रारंभ होने से पहले ही नष्ट कर दे।

यह रचना केवल युद्ध-विरोध नहीं, बल्कि एक गहरी मानवीय पुकार है—बुद्ध के करुणा मार्ग, अशोक के परिवर्तन और गीता के धर्म संदेश की ओर लौटने की।