पं शिवनारायण जी मॉर्निंग वॉक के दौरान बेफिजुल रंग जमाते बोले गर रंग न होते तो किसी की रंगत ही नहीं होती ।किस्म किस्म के लोग रंग जमाने के लिए तरह-तरह के रंग बदलते हैं ।दुनिया द्वारा रंग बदलने की खबर कॉलोनी के बगीचों में कुछ गिरगिटों को पता चली तो गिरगिट बोले हम यूं ही बदनाम है रंग बदलने में ! ट्रंप नाम का मानव जीव रंग बदलने में हमसे ज्यादा उस्ताद है।ट्रंप हम गिरगिटों का पर्याय बन गए है ।
रंग बदलने में बदनाम जब कुछ गिरगिट इकट्ठा हुए तो रंग बदल बदल कर थक चुका वृद्ध गिरगिट बोला हमारे देखा-देखी इंसान रंग बदलने में महारत हासिल कर चुके हैं ।
ट्रंप रंग बदलने में हमारे ब्रांड एम्बेसेंडर है । हममें और ट्रंप मैं मौलिक अंतर है हम गिरगिट त्वचा का रंग बदलते हैं केवल सुरक्षा के लिए लेकिन ट्रंप सियासी धाक जमाने के लिए कब वाचा बदल दे कोई ठिकाना नहीं है ,राजनीतिक जाजम बिछाने के लिए रंग बदलने में कोई देर नहीं करते हैं। हम दोनों एक दूसरे के पर्याय है ।बार-बार रंग बदलने के लिए ट्रंप झूठ का का कारोबार चलाते हैं झूठ पर झूठ बोलकर सच को झूठलाने में माहिर हो चुके है ।रंग बदलने और झूठ बोलने की कवायद से हमारे रंग बदलने के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है ।हम तो दो-चार तरह के प्राकृतिक रंगों को बदलकर अपने आप को बचाते हैं लेकिन मुंए इस तरह के इंसान तरह-तरह के रंग बदल बदल कर कईयों को बदरंग कर अपना रंग जमाने से नहीं चूकते हैं ।
वृद्ध गिरगिट के इस हताशा भरे बयान को सुनकर नए नवेले व किशोर गिरगिट जो रंग बदलने के प्रशिक्षण से गुजर रहा था ।बोला ये इंसान जब भी रंग बदलने की बात आती है तो हमें दांव पर लगा कर कहते हैं गिरगिट की तरह रंग मत बदलो ! लेकिन खुद एक, दो नहीं बीसियों बार रंग बदलते हैं और रंगीन नजारे को हथियाने का प्रयास करते हैं ,अपनी झांकी जमाने के लिए रंग जमाते हैं ।सियासी रंग जमाने के लिए कभी दो रंगी , कभी तिरंगी तो कभी बहूरंगी मुखौटा पहनकर सियासी रंग को हासिल करना चाहते हैं ।ताकि जब भी रंग खेलने की या ढूंलने की बात आए तो रंग ढुले सरकार का और मिर्जा होली खेले , को अपना कर सरकारी रंग ढोल कर वे हमेशा रंगीन बने रहे ।
यह सुनकर एक चपल गिरगिट बोला कि मैं एक दिन बगीचे में एक साहब के गमले के बगीचे के थ्रू उनके बंगले में पहुंच गया तो वहां जो मैंने देखा उसको देखकर मेरे चेहरे का रंग उड़ गया। पहले तो साब मुझे देखकर बड़बड़ाए कि साला यह रंग बदलने वाला गिरगिट यहां आकर मेरे रंग बदलने की प्रवृत्ति की किरकिरी कर देगा ।कोई बाहर वाला इस गिरगिट को देखकर समझेगा कि यह वही साब है जो इस गिरगिट की तरह रंग बदलने में उस्ताद है। मेरे इस रंग बदलने के खौफ से उन्होंने पहले तो मुझ जैसे तुच्छ गिरगिट को नजरों से गिराने की कोशिश की क्योंकि वे लोगों को नजरों से गिरा गिरा कर वे गिराने के अभ्यस्त हो चुके थे।
इसी बीच इंसान के डर से अपने को बचाने के लिए एक गिरगिट साहब के पड़ोस में पहुंच गया तो अंदेशा हुआ कि अभी तक मैंने जितने रंग बदले इन गिरगिटो के कारण … मैं गिरगिटो की तरह रंग बदलने वाला साहब न.बन जाऊं ,इस कारण उन्होंने अपने सारे नौकर चाकर को मुझे भगाने में लगा दिया । ताकि कॉलोनी वाले गिरगिट और उनके रंग बदलने के वाकिए से वाकिफ न हो सके ।
गिरगिटों की चर्चा सुनकर सुनील भैया बोले अरे जब रंग जमाने की बात चली रही है तो एक दिन मेरे गांव में पंचतंत्र की कहानी सुनकर और उनसे प्रेरणा लेकर इलाके के माननीय , रंगे सियार, की झूठ की प्रवृत्ति को अपनाकर अपना रंग जमाने में सफल हो गए। वे बोले गिरगिट और ,रंगे सियार, की कहानी के रंगों से जुड़ाव को देखकर रंगों से अपने बॉडी लैंग्वेज और हाव भाव को सरोबार कर लिया ।वे बोले रंग और लोगों के चेहरे का अनूठा रिश्ता है । लोगों के चेहरे के रंग बदलते रहते है । वे बोले लाल पीले कैसरिया रंग चेहरों के बदलते रंगों के पासंग में भी नहीं लगते हैं ! जब चेहरे का रंग उड़ता है तो डर ,घबराहट
हैरानी को जाहिर करता है । चेहरा वही है लेकिन रंग बदलने वाला चेहरा कभी खुशी ,कभी गम, कभी सफलता ,कभी कारगुजारियों को उजागर कर देता है ।जब चेहरे पर एक रंग आता है दूसरा जाता है तो घबराहट चरम पर होती है । चेहरे बेरंग हो जाते हैं और चेहरे पर हवाइयां उड़ती दिखती है जब चेहरे पर लाल और गुलाबी रंग दिखता है तो ये रंग गुस्से और तमतमाए स्वरूप को बता देते हैं ।बात बेबात होती है तो चेहरा लाल पीला पड़ जाता हैl किसी को जब चेहरा रंगीन नजारे लिए होता है तो वह खुश और तरो ताजा दिखलाई पड़ता है ।जब चेहरे पर सफेदी झलकती है तो सफेद रंग उम्र का चढ़ता रंग दिखाता है ।जब आंखें लाल होती है तो विरोध प्रकट होता है, जब आंखें लाल के साथ पीले रंग की हो जाती है तो विरोध चरम पर होता है। रंग बदलने और रंग तथा चेहरे की चर्चा का उपसंहार करते हुए प्रो मदन लाल जी बोले रंग जमाने में चाहे ,रंगा सियार, हो या गिरगिट की तरह रंग बदलने वाला हो ,रंग बदलने में इंसानों का कोई मुकाबला नहीं है। यही चलता रहा तो जब भी रंगों की बात आएगी ,इंसानों के रंग बदलने में माहिर होने और रंग बदलने में इंसानों द्वारा गिरगिटों के रंग बदलने के अस्तित्व के खतरे का जिक्र जरूर आएगा !
Comments ( 1)
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डॉ मुकेश 'असीमित'
42 seconds agoयह रचना रंग बदलने के मुहावरे को बेहद रोचक, चुटीले और समकालीन अंदाज़ में विस्तृत करती है। गिरगिट को केंद्र में रखकर इंसानी स्वभाव, राजनीतिक अवसरवाद और सामाजिक ढोंग पर अच्छा व्यंग्य किया गया है। भाषा में खिलंदड़पन है और कई जगह तीखा कटाक्ष भी उभरता है।