Login    |    Register
Menu Close

Tag: कुम्भनदास

"अमूर्त रेखाचित्र जिसमें चाँदनी रात के नीचे वृंदावन कुंजों में राधा-कृष्ण गोपियों संग महारास रचाते हुए, चारों ओर नृत्य, मुरली की धुन और काव्य-पदावलियों की आभा बिखरी हुई।"

“महारास: राधा–कृष्ण की लीलाओं में कवियों का अमर रस”

गणेश झांकी में महारास का आयोजन बचपन की रासलीला की याद दिला गया। परंपरागत पदावली और छंदों की जगह आज डीजे और पैरोडी ने ले…

Spread the love