Dinesh Gangarde
Mar 7, 2026
व्यंग रचनाएं
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जब नौकरी विदा लेती है तो जीवन में एक नई नायिका प्रवेश करती है—पेंशन। यह ऐसी प्रेमिका है जो हर महीने समय पर आती है, मूड नहीं बदलती और बुढ़ापे में आत्मसम्मान और सुकून का सहारा बन जाती है। हास्य-व्यंग्य के अंदाज़ में पेंशन की इसी “वफादार महबूबा” पर यह रोचक लेख।
Prem Chand Dwitiya
Feb 24, 2026
व्यंग रचनाएं
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कभी पटिए पर बैठकर शहर की राजनीति, समाज और संस्कार तय होते थे; अब वही चर्चाएँ व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम की स्क्रीन पर सिमट गई हैं। पटिया संस्कृति का यह पटाक्षेप समय की विडंबना है।
Pradeep Audichya
Feb 22, 2026
व्यंग रचनाएं
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राजमहल जैसे वैभव के बीच, असली युद्ध तंदूर पर था—एक रोटी की तलाश में खड़े आधुनिक अर्जुन।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 16, 2026
व्यंग रचनाएं
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फरवरी की गुलाबी ठंडक में वैलेंटाइन घाट पर इंसान प्रेम का प्रदर्शन कर रहे थे, और दो भोले गधे इंसान बनने की कोशिश में पकड़े गए। भला हो धोबी का—कम से कम दो गधों को इंसान बनने से बचा लिया!
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 9, 2026
व्यंग रचनाएं
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पेट की राजनीति बड़ी सीधी है—खाली पेट सिर्फ़ खाना माँगता है, भरा पेट सवाल। बब्बन चाचा के पेट से देश की प्रगति नापी जा सकती है, क्योंकि जहाँ खाना दिखा, वहाँ लोकतंत्र अपने आप चुप हो जाता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 4, 2026
व्यंग रचनाएं
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आज रिश्ते तय नहीं होते, डेमो दिए जाते हैं। बायोडाटा अब परिचय नहीं, प्रोडक्ट कैटलॉग है—जिसमें माइलेज, एसेट्स और फ्री एक्सेसरीज़ गिनाई जाती हैं। सवाल बस इतना है:
क्या संस्कार भी EMI पर मिलते हैं?
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 21, 2026
व्यंग रचनाएं
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बेटा पैदा करने की ज़िद में परिवार ने इतिहास नहीं, मानसिकता की केस-स्टडी लिख दी।
नौ बेटियाँ जैसे प्राकृतिक आपदा और बेटा जैसे एनडीआरएफ की टीम।
‘काफ़ी’ और ‘माफ़ी’ बेटियों के नाम नहीं, समाज के लिए छोड़े गए मूक नोट्स हैं।
समाज आज भी प्रसव-कक्ष के बाहर खड़ा पूछ रहा है—“लड़का हुआ या फिर…?”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 16, 2026
व्यंग रचनाएं
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“जो लिखा है, वही होगा—बाक़ी सब तर्क अतिरिक्त हैं।”
“किस्मत ने परमानेंट मार्कर से लिखा है साहब।”
“इंसान से सहमति नहीं ली गई, फिर भी संविधान लागू है।”
“कुछ लोग फूल लिखाकर लाए, कुछ काँटे समेटते रह गए।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 14, 2026
व्यंग रचनाएं
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मरना तय था, यह हम मान चुके थे—
पर किस तत्व से मरना है, यह विकल्प भी अस्पताल तय करेगा,
यह हमें बताया नहीं गया।
पहले आग, अब पानी…
लगता है अस्पताल पंचतत्व को
सीरियल-वाइज टेस्ट कर रहा है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 10, 2026
व्यंग रचनाएं
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दुनिया की कूटनीति कभी-कभी इतनी जटिल नहीं होती, जितनी एक रूसे फूफा की नाराज़गी।
एक फोन कॉल, थोड़ी तारीफ़ और ज़रा-सा अपनापन—
न हो तो टैरिफ, ट्वीट और ताने वैश्विक स्तर पर चलने लगते हैं।