हां हम तिलचट्टे हैं लेकिन तिल तिल कर चट नहीं करते !

Prem Chand Dwitiya May 19, 2026 व्यंग रचनाएं 0

कॉकरोच बिरादरी पर सिस्टम पर हमले का आरोप लगते ही तिलचट्टों की आपात बैठक बुला ली गई। बैठक में वृद्ध, युवा, पर्यावरण प्रेमी और राजनीतिक चेतना से लैस कॉकरोचों ने मनुष्य जाति पर पलटवार किया। उनका सीधा सवाल था—हम तो किचन वेस्ट खाते हैं, जंगलों की तबाही झेलते हैं, मिट्टी को उर्वर बनाते हैं; असली निकृष्ट जीव कौन है?

मेडिकल कॉन्फ़्रेंस: मेरे संस्मरणों से

डॉ मुकेश 'असीमित' May 18, 2026 संस्मरण 1

मेडिकल कॉन्फ़्रेंस ज्ञान-वृद्धि के लिए होती हैं, ऐसा ब्रोशर कहता है। लेकिन डॉक्टरों, फार्मा स्टॉलों, गिफ्ट बैगों, फूड कोर्ट और फैमिली ज़ोन के बीच ज्ञान बेचारा अक्सर आख़िरी पन्ने पर चिपका हुआ मिलता है। यह संस्मरण उसी अकादमिक मेले का हास्य-व्यंग्यात्मक चित्र है।

शोक सभा में जाने की कला: बाब्बन चाचा की फील्ड ट्रेनिंग

डॉ मुकेश 'असीमित' May 8, 2026 व्यंग रचनाएं 0

शोक सभा में जाना भी एक सामाजिक परीक्षा है। बाब्बन चाचा इस परीक्षा में इतने अनुभवी हैं कि संवेदना व्यक्त करते-करते रिश्ता, पुट्टी और प्रॉपर्टी तक की चर्चा छेड़ देते हैं।

साहित्य में विज्ञान का विलोम प्रयोग

डॉ मुकेश 'असीमित' May 7, 2026 व्यंग रचनाएं 0

जब साहित्य प्रयोगशाला बन जाए, पुरस्कार गुरुत्वाकर्षण से गिरने लगें और चापलूसी ‘सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट’ की जगह ले ले — तब न्यूटन, आर्किमिडीज़ और डार्विन भी व्यंग्य में प्रवेश कर जाते हैं। डॉ. मुकेश ‘असीमित’ का समकालीन साहित्य पर तीखा, चुटीला और वैज्ञानिक कटाक्ष।

पति चाहिए: एक आधिकारिक वैवाहिक विज्ञप्ति

डॉ मुकेश 'असीमित' May 5, 2026 व्यंग रचनाएं 0

जब पति भी नौकरी की तरह “फुल-टाइम वैकेंसी” बन जाए, तो समझिए वैवाहिक जीवन ने नया स्टार्टअप मॉडल पकड़ लिया है। यह व्यंग्य न केवल हँसाता है, बल्कि शादी की सच्चाइयों का आईना भी दिखाता है।

थर्ड एसी में दो बाल-आतंकियों के संग – एक हास्य-व्यंग्यात्मक रेल यात्रा संस्मरण

डॉ मुकेश 'असीमित' May 4, 2026 संस्मरण 0

थर्ड एसी की एक साधारण-सी यात्रा कैसे दो बच्चों की वजह से हास्य और अराजकता का महाकाव्य बन जाती है—यह संस्मरण उसी अविस्मरणीय रात की कहानी है, जहाँ नींद शहीद हो जाती है और व्यंग्य जन्म लेता है।

ब्रज की एयरलाइंस: ब्रज भाषा में मजेदार फ्लाइट अनाउंसमेंट

डॉ मुकेश 'असीमित' May 3, 2026 हास्य रचनाएं 0

कल्पना कीजिए, अगर ब्रज क्षेत्र की अपनी एयरलाइन होती और पायलट, एयरहोस्टेस, क्रू सब ब्रज भाषा में घोषणाएँ करते—तो सीट बेल्ट से लेकर लैंडिंग तक हर बात रस, ठिठोली और जय श्रीराधे में भीग जाती।

विश्वास करने की कला –आर्ट ऑफ़ बीलिविंग

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 24, 2026 व्यंग रचनाएं 0

विश्वास जीवन की सबसे पुरानी मुद्रा है। गणित के मास्टरजी के “मान लो” से लेकर प्रेमी के चाँद-तारे, बाबा के स्वर्ग, बाजार की स्कीम और राजनीति के घोषणा पत्र तक—हर जगह आदमी विश्वास करता कम है, करवाया ज्यादा जाता है।

किताबों के साथ वो आँख-मिचौली वाला बचपन

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 23, 2026 व्यंग रचनाएं 0

विश्व पुस्तक दिवस पर यह व्यंग्य लेख उस दौर को याद करता है जब किताबें दोस्त थीं, किराये पर चलती थीं, तकिये के नीचे छुपाई जाती थीं और मोरपंख के साथ विद्या माता को समर्पित रहती थीं। आज के डिजिटल समय में किताबें पढ़ी कम, कोट और सेल्फ़ी ज़्यादा की जाती हैं—इसी विडंबना को लेख ने चुटीले अंदाज़ में पकड़ा है।

लाइन में खड़े रहने का हुनर: भारतीय जीवन की सबसे बड़ी स्किल पर व्यंग्य

Prem Chand Dwitiya Apr 15, 2026 व्यंग रचनाएं 1

भारतीय समाज में लाइन में लगना एक कला बन चुकी है—गैस सिलेंडर से लेकर ऑनलाइन बुकिंग तक। पढ़िए एक रोचक और तीखा व्यंग्य “लाइन में खड़े रहने का हुनर”।