विवाह समारोह की टेबल पर लटका क्यू आर कोड !

Prem Chand Dwitiya Jul 13, 2026 व्यंग रचनाएं 1

क्यूआर कोड ने दुकानों, सब्जी मंडियों, टिकटों और भीख मांगने तक के तरीकों को बदल दिया है। लेकिन जब बाबू चाचा ने बेटे की शादी में लिफाफों की जगह उपहार काउंटर पर क्यूआर कोड लटका दिया, तब डिजिटल भुगतान ने विवाह की परंपराओं में भी शानदार प्रवेश कर लिया। आधुनिक तकनीक और सामाजिक व्यवहार पर रोचक हास्य-व्यंग्य।

अभी विश्राम में रहें — रिश्वतखोर अफसरों के नाम गोपनीय सावधानी-पत्र

Ram Kumar Joshi Jul 13, 2026 व्यंग रचनाएं 1

प्रदेश के रिश्वतखोर अधिकारियों को एक अत्यंत गोपनीय ई-मेल मिलता है। उसमें चेतावनी दी गई है कि फिलहाल सरकार, एसीबी और ग्रह-नक्षत्र—तीनों प्रतिकूल चल रहे हैं। इसलिए कुछ समय रिश्वत से विश्राम लेकर भजन-कीर्तन में मन लगाना ही सुरक्षित है। अफसरशाही, भ्रष्टाचार और सत्ता के बदलते चरित्र पर तीखा व्यंग्य।

Dr. Mukesh Aseemit Creations—शब्द, स्वर और संवेदना का संसार

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 13, 2026 Lifestyle 0

शब्दों में व्यंग्य, सुरों में संवेदना और रचनाओं में अपने समय की धड़कन—‘Dr. Mukesh Aseemit Creations’ साहित्य, मौलिक संगीत, कविता, भक्ति और सामाजिक चिंतन का एक रचनात्मक YouTube मंच है।

संसदीय गलियारों में दिवंगत कवियों का महासम्मेलन-विषय बजट और बसंत

डॉ मुकेश 'असीमित' Jun 29, 2026 व्यंग रचनाएं 0

बजट आया, बसंत आया, सत्ता ने इसे बहार कहा, विपक्ष ने पतझड़ और आम आदमी ने अपनी खाली थाली देखी। इसी बीच राष्ट्रपति भवन में दिवंगत कवियों का काल्पनिक महासम्मेलन सजता है, जहाँ हर कवि अपने अंदाज़ में बजट का हिसाब पूछता है।

बचा हुआ लोकतंत्र | वोट, जनता और सत्ता पर तीखा राजनीतिक व्यंग्य

Pradeep Audichya Jun 23, 2026 व्यंग रचनाएं 0

बचा हुआ लोकतंत्र,, – लोकतंत्र किसके पास है ? ये प्रश्न मंच ने नीचे भरी सभा में फेंका ।इतनी जोर से फेंका कि तंत्र द्वारा घेरकर लाए गए लोक ( लोग) डर गए। लोग सोचने लगे शायद कुछ चोरी हो गया और इसका इल्ज़ाम हमपर आयेगा ।सभा में लोग एक दूसरे को संदेह की निगाह […]

चौबे जी हो गये डब्बे जी-आरोप, गाली और गले मिलन की व्यंग्य गाथा

Ram Kumar Joshi Jun 9, 2026 व्यंग रचनाएं 1

लोकतंत्र, राजनीतिक बहस, आरोप-प्रत्यारोप और पंचायत की अराजकता पर आधारित डॉ. राम कुमार जोशी का तीखा एवं हास्यपूर्ण हिंदी व्यंग्य।

टैंकर देखकर प्यास बुझाओ

Pradeep Audichya Jun 7, 2026 व्यंग रचनाएं 0

"टैंकर देखकर प्यास बुझाओ" प्रसिद्ध व्यंग्यकार प्रदीप औदिच्य की एक मार्मिक और तीखी व्यंग्य रचना है, जिसमें ग्रामीण भारत की जल समस्या, सरकारी विभागों की लालफीताशाही, कागजी विकास, हैंडपंपों की दुर्दशा और फोटो-आधारित राजनीति पर करारा कटाक्ष किया गया है।

मर्द में छिपा हुआ ए आई एजेंडा पहचानों !

Prem Chand Dwitiya Jun 7, 2026 व्यंग रचनाएं 1

क्या पुरुष सचमुच महिलाओं की उन्नति चाहते हैं या उनके भीतर कोई छिपा हुआ 'एआई एजेंडा' काम करता है? सुंदरता, आरक्षण, सामाजिक व्यवहार और पुरुष मानसिकता पर एक धारदार व्यंग्य।

बात में वज़न होना चाहिए

डॉ मुकेश 'असीमित' May 29, 2026 व्यंग रचनाएं 0

आज के समय में सिर्फ बात करना काफी नहीं है, बात में वज़न भी होना चाहिए। राजनीति से लेकर मीडिया, ज्योतिष, अर्थव्यवस्था और चिकित्सा जगत तक हर जगह "भारी" शब्द का बोलबाला है। डॉ. मुकेश असीमित का यह व्यंग्य उसी मानसिकता पर चुटीला कटाक्ष है, जहाँ हल्की बातों की कोई कीमत नहीं और हर चीज़ को खबर बनने के लिए भारी होना ज़रूरी है।

टाइम ट्रैवल: ब्रह्मांड की पुरानी फाइल में नई नोटशीट

डॉ मुकेश 'असीमित' May 28, 2026 ललित निबंध 0

टाइम ट्रैवल का सपना हर आदमी ने कभी-न-कभी देखा है—काश अतीत में जाकर दो-चार गलतियाँ सुधार आते। लेकिन ब्रह्मांड कोई तहसील का बाबू नहीं कि पुरानी फाइल में नई नोटशीट लगाकर मामला निपटा दे।