प्रेम पत्र में घोस्ट राइटिंग

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 5, 2026 व्यंग रचनाएं 0

“मैं उस दौर का अनाम प्रेमाचार्य था, जिसने प्रेम के सर्वहारा वर्ग के लिए जनहित याचिका की तरह प्रेमपत्र लिखे—निःशुल्क, निस्वार्थ और निस्संग।” “बिना शायरी के प्रेमपत्र ऐसा ही होता जैसे दाल बिना तड़के।” “एक ही प्रेमिका के लिए लिखते-लिखते हम भी ऊब गए—पर प्रेमियों के दिलों में आग बराबर जलती रही।”