जब लाइट चली गई… और ज़िंदगी फिर भी जलती रही

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 5, 2026 हास्य रचनाएं 0

बचपन में लाइट जाना उत्सव था—कहानियाँ, तारे और परिवार। आज लाइट जाए या ग्रिड फेल हो—ज़िंदगी स्क्रीन के सहारे चलती है। यह कार्टून उसी बदलाव पर एक हल्का, चुभता और मुस्कराता व्यंग्य है।