हवाओं से जंग और अज़्म की जीत

Shakoor Anvar Jan 8, 2026 गजल 0

तेज़ हवाओं और उग्र लहरों के बीच खड़ा मनुष्य जब हार मानने को होता है, तभी उसका अज़्म उसे जीवन की ओर लौटा लाता है। यह कविता द्वेष से मुक्त होकर, वफ़ा के सागर में एक नए जीवन-निज़ाम की कल्पना करती है।

तीन रोटियों की माँ”(कमी, ममता और संघर्ष)

Wasim Alam Jun 25, 2025 कहानी 2

इस चित्र में झलकती है एक ऐसी औरत की कहानी, जो दिन भर अस्पताल की सफ़ाई करती है लेकिन असल में अपने जीवन की जद्दोजहद भी झाड़ती है। उसकी थकी आँखों में तीन बच्चों की ज़िम्मेदारी, माँ की ममता और पति की मजबूरी का बोझ साफ़ झलकता है। वह औरत कोई शिकायत नहीं करती, न ही अपने हालात पर रोती है — बस मुस्कराकर कहती है “सब ठीक है।” यह दृश्य सिर्फ़ एक कामवाली की नहीं, बल्कि उन लाखों स्त्रियों की प्रतिछाया है, जो अपनी पीड़ा को चुपचाप पी जाती हैं, लेकिन पूरे परिवार की रीढ़ बनी रहती हैं — बिना दिखावे के, बिना थमे।