लोकतंत्र : संवैधानिक प्रावधान और वास्तविक व्यवहार में बड़ा अंतर

Dr Shailesh Shukla Jun 23, 2026 समसामयिकी 0

लोकतंत्र : संवैधानिक प्रावधान और वास्तविक व्यवहार में बड़ा अंतर डॉ. शैलेश शुक्ला लोकतंत्र को विश्व की सर्वाधिक जनोन्मुख और उत्तरदायी शासन व्यवस्था माना जाता है। इसकी मूलअवधारणा अत्यंत सरल और आकर्षक है—सत्ता का वास्तविक स्रोत जनता होती है। जनता अपनेप्रतिनिधियों का चुनाव करती है, सरकार बनाती है और अंततः वही शासन की अंतिम स्वामिनी होती […]

डॉ. शैलेश शुक्ला की 5 लघुकथाएँ

Dr Shailesh Shukla Mar 7, 2026 लघु कथा 1

डॉ. शैलेश शुक्ला की ये पाँच लघुकथाएँ — वारिस, नमक का हक़, कागज़ की ढाल, जाति की छतरी और मुफ़्त का नशा — हमारे समाज की गहरी विडंबनाओं को उजागर करती हैं। लालच, विश्वासघात, व्यवस्था की असमानता, जातिगत राजनीति और मुफ़्तखोरी की मानसिकता पर ये कथाएँ संक्षिप्त होते हुए भी तीखा सामाजिक प्रश्न खड़ा करती हैं।