मक्खनमहापुराण-चापलूस्योपनिषद् का उत्तर आधुनिक खंड

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 26, 2026 व्यंग रचनाएं 0

“मक्खनमहापुराण” चापलूस्योपनिषद् का उत्तर-आधुनिक संस्करण है, जहाँ प्रशंसा और चाटुकारिता के बीच की महीन रेखा पर तीखा व्यंग्य किया गया है। यह रचना दिखाती है कि कैसे ‘मक्खनयोग’ आज के दफ्तर, साहित्य, राजनीति और सामाजिक जीवन का अनिवार्य शास्त्र बन चुका है—जहाँ योग्यता से ज्यादा ‘लोचदार जीभ’ और सही समय पर किया गया लेपन ही सफलता की असली कुंजी है।

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 10, 2026 Poems 0

यह रचना हिंदी को “राजभाषा” के तमगे से बाहर निकालकर दफ़्तर, घर, गली और मनुष्य के बीच खड़ी दीवार पर सवाल करती है— क्या भाषा सिर्फ़ एक दिन का उत्सव है या रोज़ की साँस?