पर्यावरण संरक्षण एवं सुधार पर केंद्रित हो विकास की हर नीति
पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन क्यों आवश्यक है? जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, सतत विकास, जल संरक्षण, जंगल, ऊर्जा और भारत के भविष्य पर आधारित विस्तृत हिंदी लेख पढ़ें।
पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन क्यों आवश्यक है? जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, सतत विकास, जल संरक्षण, जंगल, ऊर्जा और भारत के भविष्य पर आधारित विस्तृत हिंदी लेख पढ़ें।
अरावली की अहमियत उसकी ऊँचाई में नहीं, उसके काम में है। सवाल यह नहीं कि पहाड़ी कितनी ऊँची है, सवाल यह है कि वह हमें क्या बचा रही है।अरावली को लेकर बहस दरअसल विकास और संरक्षण के बीच उस संतुलन की तलाश है, जो अक्सर नीति में खो जाता है और प्रकृति में दिखाई देता है।
छठ पर्व केवल आस्था का उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति, राष्ट्र और संस्कृति के प्रति समर्पण का सामूहिक संकल्प है। यह लेख छठ मैया की भक्ति के माध्यम से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्र प्रेम और जनकल्याण की भावना का संदेश देता है — जहां सूर्य उपासना के साथ-साथ देशभक्ति और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम दिखाई देता है।
भारत में हरियाली और विकास की बहस पुरानी है। अक्सर आर्थिक तरक्की के नाम पर पर्यावरण की अनदेखी होती रही है। पर यह टकराव अनिवार्य नहीं। सही नीतियों, जन-जागरूकता और पर्यावरण-संवेदनशील विकास मॉडल के ज़रिए हरियाली और तरक्की दोनों संभव हैं। स्कैंडिनेवियाई देश इसका उदाहरण हैं, और भारत में भी ऐसी संभावनाएं बन रही हैं।
नेताजी पिछले पांच साल में जब से विधायक की कुर्सी हथियाई है, तब से प्रकृति प्रेम दिखाने के जो भी तरीके हो सकते हैं वो सभी अपनाए हैं। बंजर पड़ी चरवाहे की भूमियों को अपने अधिग्रहण करके उनमे एक आलिशान फार्म हाउस बनवाया है . उसमें पाताल तोड़ सबमर्सिबल लगाकर उसके मीठे पानी से विदेशी […]