पहचान शब्दों से नहीं, साधना से बनती है

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 24, 2026 Self Help and Improvements 0

मनुष्य की पहचान उसके दावों से नहीं, उसके दैनिक चयन और प्रतिबद्धता से बनती है। हम जो निरंतर सोचते और साधते हैं, वही हमारे चरित्र और नियति को आकार देता है।