तपती धरती, तड़पता जीवन और तंत्र की तंद्रा : बिगड़ता पर्यावरण संतुलन औरअस्तित्व का संकट

Dr Shailesh Shukla May 25, 2026 Agriculture/environment 1

भीषण गर्मी, सूखते जलस्रोत, प्रदूषित हवा और अनियोजित विकास आज मानव सभ्यता के सामने अस्तित्व का संकट बनकर खड़े हैं। यह लेख पर्यावरण संतुलन के बिगड़ते हालात और धरती को बचाने की अनिवार्यता पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत करता है।

पर्यावरण संरक्षण एवं सुधार पर केंद्रित हो विकास की हर नीति

Dr Shailesh Shukla May 8, 2026 Agriculture/environment 0

पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन क्यों आवश्यक है? जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, सतत विकास, जल संरक्षण, जंगल, ऊर्जा और भारत के भविष्य पर आधारित विस्तृत हिंदी लेख पढ़ें।

शुभ लाभ-फटूकड़ियां – 2025

Prahalad Shrimali Oct 16, 2025 व्यंग रचनाएं 0

दीपावली की यह व्यंग्यात्मक ‘फटूकड़ियां 2025’ केवल रोशनी का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र, राजनीति, न्याय और समाज की मानसिकता पर तीखा हास्य है। लेखक प्रह्लाद श्रीमाली ने पटाखों की जगह बयानों, दीपों, और विचारों को जलाकर एक ऐसी दीपमाला रची है जिसमें नागरिक विवेक, राजनैतिक धुआं और आत्मावलोकन की झिलमिलाहट सब एक साथ चमकते हैं।