एकात्म मानववाद : भारतीय चिंतन की समग्र विकास-दृष्टि

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 13, 2026 शोध लेख/विमर्श 0

एकात्म मानववाद भारतीय चिंतन की वह समन्वयवादी दृष्टि है जो मनुष्य को केवल आर्थिक इकाई नहीं बल्कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा से बने समग्र अस्तित्व के रूप में देखती है। यह दर्शन व्यक्ति, समाज, संस्कृति और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करते हुए विकास को समग्र रूप में समझने की प्रेरणा देता है।