पंचतत्व पैकेज : आत्मा की शिकायत पेटी से

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 14, 2026 व्यंग रचनाएं 0

मरना तय था, यह हम मान चुके थे— पर किस तत्व से मरना है, यह विकल्प भी अस्पताल तय करेगा, यह हमें बताया नहीं गया। पहले आग, अब पानी… लगता है अस्पताल पंचतत्व को सीरियल-वाइज टेस्ट कर रहा है।

अलविदा पच्चीस!-kavita-dr mueksh

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 31, 2025 हिंदी कविता 0

वर्ष पच्चीस एक ही नहीं था—वह हर व्यक्ति के लिए अलग निकला। कहीं हँसी थी, कहीं आँसू; कहीं खजाना भरा, कहीं खाली हाथ। यह कविता समय की उसी भीड़ को दर्ज करती है जहाँ हर जीवन अपना-सा सच लेकर चलता है।

जा तू धन को तरसे — एक व्यंग्यात्मक धनतेरस कथा

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 18, 2025 व्यंग रचनाएं 0

धनतेरस के शुभ अवसर पर जब जेबें खाली हैं और बाज़ार भरा पड़ा है, तब लेखक हंसी और व्यंग्य से पूछता है — “धनतेरस किसके लिए शुभ है?” यह रचना बताती है कि असली उल्लू कौन है — वह जो लक्ष्मी जी के साथ उड़ता है या वह जो उनकी प्रतीक्षा में खाली वॉलेट थामे बैठा है। हास्य, कटाक्ष और सटीक सामाजिक टिप्पणी से भरा व्यंग्य।

अंगूठे का दर्द,अंगुली नहीं जानती

Pradeep Audichya Sep 21, 2025 व्यंग रचनाएं 0

"अंगूठा डिजिटल युग का असली मुखिया है—स्याही वाले निशान से पहचान तक और मोबाइल की स्क्रीन पर टाइपिंग तक। लेकिन दुख यह है कि अंगूठे की जिम्मेदारी जितनी बढ़ी, सम्मान उतना नहीं मिला। उंगलियाँ अंगूठियों से सजती-संवरती रहीं, और अंगूठा दर्द झेलता रहा। उसका दुख वही है—‘अंगूठे का दर्द, अंगुली नहीं जानती।’ यही व्यंग्य है कि पहचान भी वही तय करे और बलिदान भी वही दे।"

जब आप लड़की देखने जाए श्रीमान तो इन पांच बातों का रखें विशेष ध्यान

Mukesh Rathor Jun 30, 2025 Blogs 0

रोटी, कपड़ा, मकान के बाद अब नौकरी और छोकरी युवा की प्रमुख आवश्यकताएं बन गई हैं। लड़की देखने जाना शादी से पहले की सबसे बड़ी सामाजिक परीक्षा है, जिसमें चाय, मुस्कान और मूक संवादों के बीच कई बार ऐसा पंच पड़ता है कि रिश्ता बनने के पहले ही बिखर जाता है।