डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 10, 2026 Poems 0

यह रचना हिंदी को “राजभाषा” के तमगे से बाहर निकालकर दफ़्तर, घर, गली और मनुष्य के बीच खड़ी दीवार पर सवाल करती है— क्या भाषा सिर्फ़ एक दिन का उत्सव है या रोज़ की साँस?

राजभाषा, ज्ञान-व्यवस्था और डिजिटल युग में हिंदी की आगे की राह

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 14, 2025 शोध लेख/विमर्श 0

हिंदी का भविष्य केवल भावनाओं से तय नहीं होगा, बल्कि छह खानों में इसकी ताक़त और चुनौतियाँ दिखती हैं—संस्कृति, व्यापार, न्याय, शिक्षा, मीडिया और सद्भाव। बोलचाल और मनोरंजन में हिंदी मज़बूत है, पर न्याय-व्यवस्था और उच्च शिक्षा में अंग्रेज़ी का प्रभुत्व चुनौती बना हुआ है। समाधान है मातृभाषा-आधारित शिक्षा, द्विभाषिक पुल, देवनागरी-प्रथम मानक और अंतरभाषिक सम्मान। हिंदी तभी लोकतांत्रिक धड़कन बनेगी जब आत्म-सम्मान और समावेशन साथ चलेंगे।

हिंदी प्रयोग, सहयोग, विरोध और गतिरोध-कविता

Dr Shailesh Shukla Jul 17, 2025 हिंदी कविता 1

यह कविता हिंदी भाषा को राजभाषा का दर्जा मिलने के बावजूद उसके व्यावहारिक उपयोग में आने वाली चुनौतियों और उपेक्षा को दर्शाती है। यह बताती है कि कैसे हिंदी केवल कागजी कार्यवाही और भाषणों तक सीमित है, जबकि दैनिक जीवन, प्रशासन और तकनीकी क्षेत्रों में अंग्रेजी का वर्चस्व है। कविता हिंदी के प्रति दिखावे के सम्मान और वास्तविक उपेक्षा के बीच के अंतर को उजागर करती है, और इस बात पर जोर देती है कि हिंदी को सही मायने में सम्मान तभी मिलेगा जब वह जन-जन की भाषा बने और हर क्षेत्र में उसका सच्चा उपयोग हो।

भाषा एवं राजभाषा के रूप में हिंदी की विकास यात्रा

Dr Shailesh Shukla Jul 3, 2025 हिंदी लेख 0

यह आलेख हिंदी भाषा की ऐतिहासिक जड़ों, संवैधानिक स्थिति, डिजिटल युग में इसकी भूमिका और वैश्विक पहचान की गहराई से पड़ताल करता है। हिंदी के सामाजिक, तकनीकी और प्रशासनिक विकास को रेखांकित करते हुए, इसे एक प्रभावी राजभाषा और सांस्कृतिक संवाहक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

संविधान सभा में हिंदी पर हुई बहसें और उनके विविध परिणाम

Dr Shailesh Shukla Jun 28, 2025 Blogs 0

यह लेख भारतीय संविधान सभा में राष्ट्रभाषा पर हुए विमर्श की जटिलता को रूपायित करती है — जहाँ हिंदी को एकता का प्रतीक मानने वालों और भाषाई विविधता के पक्षधर विचारों में संघर्ष स्पष्ट है। यह भाषाई नीति, पहचान और संवैधानिक समझ का प्रतीकात्मक चित्रण है।