तीर चल दिया मां — इस बार तुक्का नहीं था

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 13, 2026 व्यंग रचनाएं 0

एक साधारण-सी घटना—तीर चलाना—कैसे समाज में असाधारण प्रतिक्रियाओं का कारण बन जाती है, यह व्यंग्य उसी मानसिकता की पड़ताल करता है, जहां व्यक्ति से ज्यादा उसकी छवि और उस पर होने वाली प्रतिक्रियाएं मायने रखती हैं।