लोकतंत्र : संवैधानिक प्रावधान और वास्तविक व्यवहार में बड़ा अंतर

Dr Shailesh Shukla Jun 23, 2026 समसामयिकी 0

लोकतंत्र : संवैधानिक प्रावधान और वास्तविक व्यवहार में बड़ा अंतर डॉ. शैलेश शुक्ला लोकतंत्र को विश्व की सर्वाधिक जनोन्मुख और उत्तरदायी शासन व्यवस्था माना जाता है। इसकी मूलअवधारणा अत्यंत सरल और आकर्षक है—सत्ता का वास्तविक स्रोत जनता होती है। जनता अपनेप्रतिनिधियों का चुनाव करती है, सरकार बनाती है और अंततः वही शासन की अंतिम स्वामिनी होती […]

संविधान दिवस: शब्दों से अधिक, एक जीवित प्रतिज्ञा

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 26, 2025 Important days 0

26 नवंबर सिर्फ कैलेंडर की तारीख़ नहीं, भारत की लोकतांत्रिक आत्मा की धड़कन है। संविधान दिवस हमें याद दिलाता है कि यह दस्तावेज़ क़ानूनों की किताब भर नहीं, बल्कि हमारे अधिकारों, कर्तव्यों, गरिमा और एकता की जीवित प्रतिज्ञा है, जिसे हमें हर दिन जीना है।