Priyanka Ghumara
Jan 12, 2026
Culture
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“यह पर्व केवल मौसम नहीं बदलता, जीवन की दृष्टि बदलता है।”
“लोहड़ी संघर्ष के बाद आने वाली राहत और संभावना का लोकउत्सव है।”
“लोकपर्वों की सादगी ही उनकी सबसे बड़ी सुंदरता है।”
“परंपरा तब जीवित रहती है, जब वह समय से संवाद करती है।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Oct 24, 2025
Culture
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“कभी ‘यंतु, नजिक, चियां-चुक’—स्वर्ग के केंद्र—कहलाने वाली धरती आज अपने ही लोक-उत्सव भूल रही है। देव उठान एकादशी हमें याद दिलाती है कि रोशनी बिजली से नहीं, स्मृति से जलती है।”
“रंग पंचमी से सामा-चकेबा और इगास तक—सैकड़ों लोक-त्यौहार विलुप्ति की कगार पर हैं। समाधान सरल है: परिवार को फिर केंद्र बनाइए, कथा सुनाइए, आँगन में देव उकेरिए, और परंपरा को फिर से जी लीजिए।”
“गोवर्धन की गोबर-आकृति, हरियाली तीज के झूले, लोहड़ी का अलाव—ये सब ‘इवेंट’ नहीं, समाज की धड़कन हैं। देव उठान की शुरुआत के साथ याद करें: अनुष्ठान का अर्थ ‘औचित्य’ है, ‘आडंबर’ नहीं।”