वोट का हाट बाजार-हास्य व्यंग्य रचना

Pradeep Audichya Nov 10, 2025 व्यंग रचनाएं 0

भरोसीलाल ने चाय के डिस्पोज़ल कप को देखते हुए कहा — “ये चाय है चुनाव और कप है जनता, चुनाव खत्म तो जनता कचरे में!” चुनाव के मौसम में बिजली ओवरटाइम करती है, सड़कें अचानक स्वस्थ हो जाती हैं, और नेता जनता की “कीमत” लगाते हुए मंडी में उतर आते हैं। वोट की कीमत कभी दस हज़ार, कभी तीस हज़ार, तो कभी एक साड़ी और पेय पदार्थ में तय होती है। भरोसीलाल का निष्कर्ष था — “इससे बढ़िया हाट बाजार तो कोई हो ही नहीं सकता!”