बचा हुआ लोकतंत्र | वोट, जनता और सत्ता पर तीखा राजनीतिक व्यंग्य

Pradeep Audichya Jun 23, 2026 व्यंग रचनाएं 0

बचा हुआ लोकतंत्र,, – लोकतंत्र किसके पास है ? ये प्रश्न मंच ने नीचे भरी सभा में फेंका ।इतनी जोर से फेंका कि तंत्र द्वारा घेरकर लाए गए लोक ( लोग) डर गए। लोग सोचने लगे शायद कुछ चोरी हो गया और इसका इल्ज़ाम हमपर आयेगा ।सभा में लोग एक दूसरे को संदेह की निगाह […]

आदमी और कुत्ते की आवारगी-व्यंग्य रचना

डॉ मुकेश 'असीमित' Aug 13, 2025 व्यंग रचनाएं 2

ह व्यंग्य इंसान और कुत्ते की आवारगी के बीच की महीन रेखा को तोड़ता है। अदालत के आदेश से कुत्तों को शेल्टर में डालने का फरमान आता है, मगर असली आवारगी तो इंसान में है—जो पूँछ हालात के हिसाब से सीधी या टेढ़ी कर लेता है। राजनीति, वोट बैंक और सोशल मीडिया के भौंकने तक, यह रचना समाज के कुत्तापन को आईना दिखाती है।