हँसी के बाद उतरती चुप्पी: व्यंग्य का असली तापमान

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 2, 2025 आलोचना ,समीक्षा 0

“व्यंग्य हँसाने की कला नहीं, हँसी के भीतर छुपी बेचैनी को जगाने की कला है। वह पल जब मुस्कान के बाद एक सेकंड की चुप्पी उतरती है—वही असली व्यंग्य है।” “व्यंग्यकार हर दृश्य को तिरछी आँख से देखता है—क्योंकि सीधी आँख से देखने पर आजकल सब कुछ सामान्य लगने लगा है, और यही सबसे असामान्य बात है।”