तंदूरी रोटी युद्ध: वीर तुम डटे रहो

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 28, 2025 Poems 0

“शादी के पंडाल में तंदूरी रोटी अब सिर्फ़ खानपान नहीं रही, पूर्ण युद्ध बन चुकी है। दूल्हे से ज़्यादा चर्चा उस वीर की होती है, जो तंदूर से सटकर खड़ा रहता है और दो रोटी के लिए इतिहास लिख जाता है। ‘वीर तुम डटे रहो’ इस जंग के मोर्चे पर खड़े हर भूखे शौर्यवान की व्यंग्य-गाथा है।”