आत्ममूल्यांकन रिश्ते का केंद्र हैं,तुम बदल गए हो पहले ऐसे नहीं थे

Priyanka Ghumara Jan 20, 2026 हिंदी लेख 1

“जहाँ दूरी पराजय नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की विजय बन जाए— वहीं से रिश्तों की सच्ची परिभाषा शुरू होती है।”

आखिर कब तक ढूढ़े मां-Poem

Mamta Avadhiya Sep 5, 2025 हिंदी कविता 0

यह रचना माँ के प्रति गहरी भावनाओं और स्मृतियों से भीगे रिश्ते का मार्मिक चित्रण है। इसमें माँ की गोद, आँचल और मुस्कान को याद करते हुए कवि अपने मन की बेचैनी, अधूरी बातों और सपनों की ओर संकेत करता है। प्रतीक्षा और तड़प इसे और भावुक बना देती है।

मै इंसान हूं-Poem

Deepak Kumar Sep 5, 2025 हिंदी कविता 0

यह कविता "इंसान" जीवन की जटिलताओं और सुंदरता का संवेदनशील चित्रण है। इसमें इंसान की खुशियों की तलाश, दुखों से जूझने की क्षमता, प्रेम और पीड़ा का संतुलन, और निरंतर सीखने की प्रक्रिया को दर्शाया गया है। यह संदेश देती है कि कठिनाइयों के बावजूद इंसान सपनों और उम्मीदों से जीता है।

मैं बच्चा हूँ, ट्रॉफी नहीं-कविता -डॉ मुकेश असीमित

डॉ मुकेश 'असीमित' Jun 30, 2025 Poems 1

यह कविता एक बच्चे की अंतरात्मा की पुकार है—जो केवल अपने लिए जीना चाहता है, किसी की महत्वाकांक्षा की ट्रॉफी बनकर नहीं। वह अपने सपनों को जीना चाहता है, न कि दूसरों के अधूरे सपनों को ढोना। उसमें संवेदना है, विद्रोह है और मानवता की गूंज है।