डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 11, 2026
Health And Hospitals
0
“यह समस्या केवल चिकित्सा जगत तक सीमित नहीं है।
यह समाज, मनुष्य, राजनीति, पर्यावरण और नैतिकता—सबमें एक साथ फैली हुई बीमारी है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि हर जगह इलाज चल रहा है,
पर बीमारी ठीक नहीं हो रही—क्योंकि इलाज ही ग़लत है।”
आज की दुनिया में सबसे बड़ा संकट बीमारी का नहीं,
बल्कि बीमारी की पहचान का संकट है।
मन की बीमारियों के लिए मोटिवेशनल वीडियो,
पर्यावरण के लिए सम्मेलन,
राजनीति के लिए भावनात्मक नारे—
ये सब प्लेसीबो हैं।
जब नक़ली इलाज सामान्य हो जाता है,
तब असली मौतें सिर्फ़ आँकड़े बनकर रह जाती हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 10, 2026
समसामयिकी
0
“युद्ध अब अचानक नहीं फूटता—वह पहले बाज़ार में उतरता है, फिर जीवन में।”
“जब शांति लाभकारी नहीं रह जाती, तब युद्ध नैतिक घोषित कर दिया जाता है।”
“हर युद्ध के बाद कोई विजेता नहीं होता—सिर्फ़ आँकड़े होते हैं।”
“इतिहास मनुष्य से एक ही प्रश्न पूछता है—क्या तुमने पहले से सीखा?”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 23, 2025
India Story \बात अपने देश की
0
अरावली की अहमियत उसकी ऊँचाई में नहीं, उसके काम में है। सवाल यह नहीं कि पहाड़ी कितनी ऊँची है, सवाल यह है कि वह हमें क्या बचा रही है।अरावली को लेकर बहस दरअसल विकास और संरक्षण के बीच उस संतुलन की तलाश है, जो अक्सर नीति में खो जाता है और प्रकृति में दिखाई देता है।