“AI हर जगह है” — एक व्यंग्य

Wasim Alam Jan 2, 2026 व्यंग रचनाएं 0

तकनीक जितनी स्मार्ट होती जा रही है, इंसान उतना ही अपने सवालों से भागता जा रहा है। AI जवाब दे रहा है— पर सवाल पूछने वाला अब खुद नहीं सोच रहा।

नाम में क्या रखा है?

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 2, 2026 व्यंग रचनाएं 0

आज के समय में नाम समाधान नहीं, विकल्प बन गया है। जहाँ समस्याएँ हटाना कठिन हो, वहाँ नाम बदल देना सबसे आसान नीति है। यह व्यंग्य उसी नाम-प्रधान विकास दर्शन पर एक तीखा मुस्कुराता कटाक्ष है।

अकादमी सम्मान की रुकी हुई घोषणा

Vivek Ranjan Shreevastav Dec 19, 2025 व्यंग रचनाएं 0

जब साहित्य अकादमी में प्रेस कॉन्फ़्रेंस बिना प्रेस और बिना कॉन्फ़्रेंस के खत्म हो जाए, तब समझ लेना चाहिए कि साहित्य से ज़्यादा राजनीति बोल रही है—और व्यंग्य चुप नहीं रह सकता।

गिरने में क्या हर्ज़ है-किताब समीक्षा-प्रभात गोश्वामी

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 15, 2025 Book Review 3

डॉ. मुकेश असीमित का व्यंग्य संग्रह ‘गिरने में क्या हर्ज़ है’ न केवल भाषा की रवानगी दिखाता है, बल्कि विसंगतियों की गहरी पड़ताल भी करता है। समकालीन व्यंग्य की धारा में यह संग्रह एक उम्मीद की रेखा खींचता है।