अनुवाद: शब्दों से परे संस्कृतियों का सेतु

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 18, 2026 आलोचना ,समीक्षा 0

अनुवाद शब्दों का यांत्रिक स्थानांतरण नहीं, बल्कि सभ्यताओं का संप्रेषण है। यह वह पुल है, जिस पर चलते हुए हम एक भाषा से दूसरी भाषा में नहीं, बल्कि एक संस्कृति से दूसरी संस्कृति में प्रवेश करते हैं। अनुवादक शब्दों के पीछे छिपे समय, समाज और संवेदना को पढ़ता है—और उन्हें नए पाठक के हृदय में पुनर्जन्म देता है।

सम्यक ज्ञान, सम्यक दृष्टि : जब जानना कम और देखना अधिक ज़रूरी हो जाता है

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 6, 2026 आलोचना ,समीक्षा 0

सम्यक ज्ञान का अर्थ अधिक जानना नहीं, बल्कि सही ढंग से देख पाना है। जहाँ शास्त्रार्थ समाप्त होकर अनुभूति शुरू होती है, वहीं से सच्चे विमर्श की यात्रा आरंभ होती है। यह लेख ज्ञान, कविता, करुणा और चेतना के उसी संतुलन बिंदु की खोज है।