मौसम और डिजिटल दरबार: भविष्यवाणियों पर तीखा व्यंग्य

Prem Chand Dwitiya Sep 4, 2026 व्यंग रचनाएं 0

सोशल मीडिया के डिजिटल दरबारों ने घाघ-भड्डरी की लोक-कहावतों से लेकर मौसम विभाग तक सबको पीछे छोड़ दिया है। पढ़िए मौसम की ऑनलाइन भविष्यवाणियों और किसानों की उलझनों पर डॉ. प्रेमचंद द्वितीय का चुटीला व्यंग्य।

उठो पार्थ, अपना मोबाइल उठाओ: सोशल मीडिया युग का नया धर्मयुद्ध

Pradeep Audichya Jul 24, 2026 व्यंग रचनाएं 1

जब जीवन का धर्मयुद्ध मोबाइल स्क्रीन पर लड़ा जाने लगे और रिश्तों की पहचान लाइक-कमेंट से होने लगे, तब आधुनिक पार्थ को जगाने के लिए केशव भी नया डिजिटल ज्ञान देते हैं। पढ़िए सोशल मीडिया की आदतों पर तीखा और मनोरंजक व्यंग्य।

पालतू कुत्ता — इंसान का आख़िरी विकास चरण

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 16, 2025 व्यंग रचनाएं 0

अब मनुष्य “सामाजिक प्राणी” से “पालतू प्राणी” में विकसित हो चुका है। पट्टा अब कुत्ते के गले में नहीं, बल्कि उसकी ईएमआई और सोशल मीडिया की आदतों में है। बच्चों से बचत कर, जिम्मेदारियों से बचकर जब जीवन में भावनात्मक खालीपन आता है — तो इंसान “टॉमी” पाल लेता है और धीरे-धीरे खुद ही कुत्तानुकरण काल में प्रवेश कर जाता है।

जीवन पर प्रकाश डालिए-हास्य व्यंग्य रचना

Pradeep Audichya Jul 14, 2025 व्यंग रचनाएं 4

सेठजी को अब ‘सेठ’ होने से संतोष नहीं, उन्हें ‘समाजसेवी’ भी बनना है—वो भी बिना समाज की सेवा किए! अखबार, होर्डिंग, माला और माइक की व्यवस्था है, गाय तक बुलवाई गई है फोटो के लिए। जीवन पर प्रकाश डालते मास्टर साहब बिजली चोरी, मंदिर पर कब्ज़ा और गरीबों की "सुरक्षा" के किस्से खोल देते हैं। मुनीम तुरंत टोका — “अब ज्यादा प्रकाश ठीक नहीं है।”