पानी–पूरी दर्शन : भारतीय ज्ञान–परंपरा का सबसे कुरकुरा, चटपटा और लोकतांत्रिक उपनिषद

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 4, 2025 हास्य रचनाएं 0

“गोलगप्पा केवल चाट नहीं—भारत का चलित विश्वविद्यालय है, जहाँ मीठा, खट्टा और तीखा स्वाद जीवन-दर्शन बनकर उतरता है।” गोलगप्पा–लाइन भारतीय लोकतंत्र की असली प्रयोगशाला है—आईएएस हो या कवि, सबकी कटोरी बराबर काँपती है

आप तो बस लिखते रहिए..

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 24, 2025 व्यंग रचनाएं 0

“आप लिखते हैं तो लोग आपको क्रांतिकारी समझ लेते हैं—खुद रिमोट बदलने से डरते हैं पर क्रांति की बंदूक आपके कंधे पर रखकर चलाना चाहते हैं। यह व्यंग्य उन लोगों का चश्मा है जो चाहते हैं—बगावत आपकी हो, जोखिम आपका हो… और तमाशा उनका।”

कान-भरैयों का महाग्रंथ :बात आपकी, कथा इनकी—और बीच में कानों की चिल्लम

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 24, 2025 व्यंग रचनाएं 0

“कान-भरैयों की दुनिया बड़ी विचित्र है—ये आधा सुनते, चौथाई समझते और बाकी अपनी कल्पना की दही में फेंटकर ऐसी तड़कती-भड़कती कहानी बना देते हैं कि बेचारा सुनने वाला सोचता रह जाए—‘मैंने तो नमस्कार कहा था, इसमें षड्यंत्र कहाँ से आ गया?’ यह व्यंग्य उन्हीं महापुरुषों का महाग्रंथ है।”