डॉ मुकेश 'असीमित'
Oct 2, 2025
व्यंग रचनाएं
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अख़बार ने लिखा — इस बार रावण 'मेड-इन-जापान'! पुतला बड़ा, वाटरप्रूफ, और दोनों पैरों से वोट माँगने तैयार। हम रोते नहीं, तमाशा देखते हैं: रावण की लकड़ी दूर से चमकती है, बच्चे खिलौने समझकर गले लगाते हैं, आयोजक स्टेज पर तालियां खाते हैं। असली रावण तो अंदर छिपा है — वह मुस्कुराता है और हर साल नया रूप धारण कर वोट, पैसा और शो भुनाता है। और सब शांत बैठे।
Ram Kumar Joshi
Sep 3, 2025
व्यंग रचनाएं
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During a saint’s sermon on life’s impermanence, a villager asked the meaning of "Late" written before names after death. His friend explained—Englishmen are buried, so they keep lying in graves, hence "Late." For us, it’s "Swargiya," since we go to heaven. Their talk outshone the sermon’s seriousness
Pradeep Audichya
Jul 31, 2025
व्यंग रचनाएं
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नेता जी ने बचपन में ही तय कर लिया था कि वह सिर्फ नेता बनेंगे। अब जनसेवा के नाम पर वह चाय की दुकानों पर घूमते हैं, उधारी बढ़ाते हैं और हर बात में कहते हैं – "मेरी बात ऊपर हो गई है।" कार्यकर्ता जेल में हो या शहर अधर में – समाधान ऊपर तय होता है।