सुसरी माया का भटकाव-हास्य व्यंग्य रचना

Ram Kumar Joshi Dec 1, 2025 व्यंग रचनाएं 4

“डा. रामकुमार जोशी की यह व्यंग्यात्मक आत्मकथा सड़कों की भीड़ से ज्यादा वैवाहिक भीड़भाड़ की कहानी कहती है। सड़क पर दिखी ‘अज्ञात मोहतरमा’ ने एक क्षण को ड्राइविंग भी भुला दी और विवेक भी। पत्नी की तिरछी नजर, इश्क का भूत, भीड़ का षड्यंत्र और नंबर प्लेट खोजने की जद्दोजहद—यह पूरा प्रसंग पति-पत्नी मनोविज्ञान पर एक बेहतरीन, हंसोड़ टिप्पणी है, जिसमें इश्क भी है, रश्क भी और भारतीय दांपत्य की शाश्वत नोकझोंक भी।”