“Social distancing के दौर में कोरोना” हिंदी कविता

Mahadev Prashad Premi Feb 2, 2024 Poems 0

कोरोना के दौर में जब कवियों की भीड़ ग़ज़लों को ‘वायरल’ करने में लगी है, कवि व्यंग्य में यही कामना करता है कि खुद कोरोना किसी पुराने रोग की तरह बीमार हो जाए। यह कविता महामारी पर मानवीय पीड़ा और हास्य का मिश्रित भाव प्रस्तुत करती है।