“मिटा कभी कोई ” हिंदी कविता महादेब “प्रेमी “द्वारा रचित

Mahadev Prashad Premi May 17, 2020 Poems 0

मेरी कविता "मिटा कभी कोई" व्यक्ति के सहस और विवेक की बात करती है की कैसे एक व्यक्ति सहस और विवेक से साधन हीन होते हुए भी कर्मशील बन जाता है और जीवन में सफल हो सकता है.

“काम क्रोध मद लोभ” हिंदी कविता

Mahadev Prashad Premi May 11, 2020 Poems 0

यह कविता जिसका शीर्षक है” काम क्रोध मद लोभ ” आज के मनुष्य की इन चार विनाशकारी प्रब्रतियो में लिप्त होने की व्यथा व्यक्त करती है ” कैसे मानुष इन दुर्व्रतियो में अध्हें होकर अपना समूल नष्ट करने पर तुला हुआ है “काम क्रोध मद लोभ”8चरन, काम क्रोध मद लोभ सब,देते कष्ट अपार,फिर भी इस […]

“ज्यों जल” हिंदी कविता by Mahadev Premi

Mahadev Prashad Premi May 10, 2020 Poems 2

नाव में बढ़ा जल और घर में बढे धन दौलत की एक ही दशा होती है. जैसे नाव में बढ़ा जल अगर अंजलि भर भर बहार को निकला नहीं गया तो वह नाव को डूबा देगा उसी प्रकार घर में बढे धन को अगर सदुपयोग नहीं किया तो बह विनाश की और ले जाता है ||

साईं हिंदी कविता by Mahadev “premi”

Mahadev Prashad Premi May 9, 2020 Poems 0

आज मेरी कविता साईं इस संसार के छल कपट मोह माया के जाल में फंसे हुए इंसान की तरफ इंगित करती है. की कैसे इस संसार के मोहजाल में अपनी स्वार्थ सिद्धि में इंसान अपने सही मूल्यों को भूलता जा रहा है “सांई”साईं इस संसार में ,मतलब के सब लोग,स्वारथ सिद्धी हो गयीं,भूल गये संयोग, […]

“दौलत” Doulat Hindi Poem by Mahadev Premi

Mahadev Prashad Premi May 8, 2020 Poems 0

आज की मेरी रचना दौलत रुपी मिथ्या भुलाबे में जो मानव जगत अपनी बहुमूल्य निधि अपना परिवार और मानव धर्म को भूल रहा है. उस दौलत के मिथ्या और छन भंगुर होने का अहसास कराता है .यहाँ दौलत शीर्षक से कविता कुंदिली विधा में रचित है जिसके ६ चरण है,सामान्यतया मेरी जितनी भी रचना है […]

“तिनका ” हिंदी कविता by Mahadev premi

Mahadev Prashad Premi May 7, 2020 Poems 0

आज की मेरी कविता उन दुराभावो को दूर करने के लिए प्रेरित है जिस के चलते हम अपने से तुच्छ या नीचे ओहदे बाले व्यक्तियों कोइ सैदेव उलाहना या निंदा करते है. किसी भी व्यक्ति विशेष को उसके पद या हैसियत के हिसाब से छोटा या नीच नहीं समझना चाहिए,परिस्थितिया आपके प्रतिकूल होने पर ही […]

Kalyug (कलयुग) हिंदी कविता by Mahadev Premi

Mahadev Prashad Premi May 5, 2020 Poems 0

कलयुग की उल्टी लीला से सभी सामना कर रहे है. कलयुग के रूप में जो उल्टी गंगा बह रही है उसका सटीक वर्णन करती हुई यह कविता आपके समक्ष प्रस्तुत है “कलयुग” कलयुग झूठ अधार है,कलयुग बेईमान,कपट, द्वेष ,पाखंड सब, हैं अवगुण की खान, है अवगुण की खान ,कि भोगी योगी बन गये,चोर लुटेरे साधु […]

Duniyadaari (दुनियादारी ) हिंदी कविता by Mahadev ‘Premi “

Mahadev Prashad Premi May 5, 2020 Poems 1

Duniyadaari (दुनियादारी ) kundili रचना इस दिनिया के मायाजाल को देख कर बनायीं है ,कैसे मनुष्य इस मायाजाल में फंसकर अपनी साड़ी जिंदगी व्यर्थ क्र देता है और जो उसका परम उद्देश्य इस जीवन में अपने आपको पहचानने का है उसको भूल गया है.